मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब: सारे फैसले सर्वसम्मत, CEC पर एकतरफा निर्णय के आरोप गलत

चुनाव आयोग (ECI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर लगे एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण…

चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब: सारे फैसले सर्वसम्मत, CEC पर एकतरफा निर्णय के आरोप गलत
(फोटो: IANS)

चुनाव आयोग (ECI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर लगे एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह जवाब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की उन याचिकाओं पर आया है, जिनमें आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए गए थे।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर यह हलफनामा दायर किया है। इसमें कहा गया है कि याचिकाएं केवल एक खबर पर आधारित हैं, जो सही नहीं है। आयोग ने जोर देकर कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी तीनों SIR आदेश आयोग के सामूहिक और सर्वसम्मत फैसले थे।

फैसलों की प्रक्रिया और आंतरिक दस्तावेज़

आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि फाइल सिस्टम के अनुसार, कोई भी फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। फाइल पर लिखी गई टिप्पणियाँ या सवाल अंतिम निर्णय नहीं होते। हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि आयोग ने अपना कोई भी आंतरिक नोट या फाइल मीडिया में जारी नहीं की है और न ही इसकी अनुमति दी है।

मतदाता सूची और फॉर्म-6 पर सफाई

मतदाताओं से जुड़ी चिंताओं पर भी आयोग ने अपना पक्ष रखा। गोवा के 97 मतदाताओं के मामले में बताया गया कि उनमें से 88 पहले से ही मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट था। आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन फॉर्म-6 को देखकर यह लग सकता था कि उसमें बदलाव किया गया है। इस भ्रम को दूर करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में भी फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को भौतिक फॉर्म की तरह अलग-अलग दिखाया जाएगा। इसके अलावा, जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी; बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके घर जाकर दस्तावेज इकट्ठा करेंगे।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

आयोग ने बताया कि मतदाता सूची में किसी भी मतदाता का नाम निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना न तो जोड़ा जाता है और न ही हटाया जाता है। साथ ही, नियमों के अनुपालन की जांच के लिए IIT और IISC के विशेषज्ञों की एक समिति भी गठित की गई है। ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार ऐसी याचिकाएं खारिज कर चुका है। आयोग ने दशहरा अवकाश के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल करने की बात कहते हुए भविष्य में विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने के लिए अदालत से अनुमति मांगी है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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