अमेरिका में जुलाई को 'भारतीय-अमेरिकी विरासत माह' घोषित करने का प्रस्ताव, आधे से ज़्यादा सांसदों का समर्थन
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है…
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें जुलाई महीने को आधिकारिक तौर पर 'इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ' घोषित करने की मांग की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रस्ताव को सदन के आधे से अधिक सदस्यों का भारी द्विदलीय समर्थन प्राप्त हुआ है।
435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में अब तक 256 सांसद इस प्रस्ताव के समर्थन में आ चुके हैं। इसका उद्देश्य कई पीढ़ियों से अमेरिकी समाज के विकास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की अहम भूमिका को मान्यता देना है। यह प्रस्ताव 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले पेश किया गया है, जिसमें कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
प्रस्ताव में क्या कहा गया है?
प्रस्ताव पेश करते हुए सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, "भारतीय-अमेरिकियों ने कई पीढ़ियों से अमेरिका को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने ऐसे वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार किए हैं जिनसे लोगों की जान बची है, रोजगार पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। साथ ही उन्होंने सेना और सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण सेवा दी है।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे गर्व है कि मेरे साथ 256 सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। यह भारतीय-अमेरिकियों की विरासत को सम्मान देने और अमेरिका को समृद्ध बनाने में उनके योगदान का जश्न मनाने का एक अवसर है।"
जुलाई का महीना ही क्यों?
इस महीने के चुनाव के पीछे एक ऐतिहासिक महत्व है। 2 जुलाई 1946 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने 'ल्यूस-सेलर एक्ट' पर हस्ताक्षर किए थे। इसी कानून ने पहली बार भारतीय मूल के प्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का अधिकार दिया था। इससे पहले दशकों तक उन्हें इस अधिकार से वंचित रखा गया था।
समुदाय का योगदान और आंकड़े
प्रस्ताव में अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया गया है कि अमेरिका में 52 लाख से अधिक लोग अपनी पहचान भारतीय-अमेरिकी के रूप में बताते हैं। यह भी रेखांकित किया गया है कि यह समुदाय अमेरिका के सबसे धार्मिक रूप से विविध समुदायों में से एक है, जिसकी जड़ें 5,000 साल से भी अधिक पुरानी सभ्यता से जुड़ी हैं। दस्तावेज़ में विज्ञान, चिकित्सा, अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को विशेष रूप से सराहा गया है। साथ ही, अमेरिकी सशस्त्र बलों और सरकार के विभिन्न स्तरों पर उनकी सेवा को भी मान्यता दी गई है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक साधारण हाउस रेजोल्यूशन है। इसके पारित होने पर कोई संघीय अवकाश घोषित नहीं होगा और न ही इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को आधिकारिक तौर पर सम्मान देना है।
इनपुट: IANS



