परमाणु कार्यक्रम पर ईरान को फ्रांस की दो टूक, प्रतिबंधों में कोई राहत नहीं
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फ्रांस ने अपना रुख़ बेहद सख़्त कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस ने साफ़ कर दिया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फ्रांस ने अपना रुख़ बेहद सख़्त कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस ने साफ़ कर दिया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान नहीं करता, तब तक उस पर लगे प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। फ्रांस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव जारी है।
सोमवार को फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा, "ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम का त्याग किए बिना उस पर लगे प्रतिबंध हटाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो का अधिकार है, जो इस मामले में उसकी अहमियत को दर्शाता है।
तेहरान का जवाब और अमेरिका को चेतावनी
फ्रांस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तेहरान में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान ने हमेशा सभी वार्ताओं में गंभीरता और ज़िम्मेदारी दिखाई है। उन्होंने कहा, "जब भी कोई समझौता हुआ, ईरान ने सद्भावना के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी भी सबसे पहले अपने वादों का उल्लंघन नहीं किया।"
बाघेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "जब भी दूसरे पक्ष ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया, हमने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। आगे भी हमारा रुख यही रहेगा।"
फ्रांस की सक्रिय भूमिका की मंशा
इससे पहले पिछले महीने भी फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने स्पष्ट किया था कि उनका देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर होने वाली बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि पेरिस तब तक संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने का समर्थन नहीं करेगा, जब तक वह अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच किसी संभावित शांति समझौते की शर्तों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाता।
इनपुट: IANS



