PoK में गहराता संकट: अमेरिकी रिपोर्ट ने पाकिस्तान की नीतियों को ठहराया ज़िम्मेदार
अमेरिका की 'जैकोबिन' पत्रिका में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हाल में हुई हिंसा और हत्याएं किसी अचानक प्रशासनिक विफलता का नतीजा नहीं, बल्कि उस राजनीतिक…
अमेरिका की 'जैकोबिन' पत्रिका में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हाल में हुई हिंसा और हत्याएं किसी अचानक प्रशासनिक विफलता का नतीजा नहीं, बल्कि उस राजनीतिक व्यवस्था का परिणाम हैं जो वहां के लोगों को उनके ही भविष्य पर सार्थक नियंत्रण से वंचित रखती है। यह रिपोर्ट उस क्षेत्र में चल रहे दशकों के सबसे बड़े जनआंदोलन की पृष्ठभूमि में आई है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि PoK की स्वायत्तता केवल दिखावटी है और जब भी लोग वास्तविक लोकतंत्र और अधिकारों की मांग करते हैं, तो इस्लामाबाद बल प्रयोग और दमन का सहारा लेता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों की तात्कालिक वजहें बिजली की बढ़ती दरें, ईंधन की कीमतें, महंगाई और गिरता जीवन स्तर थीं। हालांकि, इन सबके पीछे गहरी राजनीतिक और आर्थिक असंतुष्टि छिपी है। PoK के लोगों को ऐसी नीतियों का बोझ उठाना पड़ रहा है, जिनके निर्माण में उनकी कोई वास्तविक लोकतांत्रिक भागीदारी नहीं है।
इस्लामाबाद का नियंत्रण और चुनावी हेरफेर
विश्लेषण में कहा गया है कि भले ही PoK का प्रशासन स्थानीय दिखाई देता हो, लेकिन सभी महत्वपूर्ण फैसलों का अंतिम अधिकार इस्लामाबाद के पास ही है। इस व्यवस्था में आर्थिक शोषण और राजनीतिक अधीनता एक-दूसरे को मज़बूत करते हैं। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि वहां चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। इस्लामाबाद आरक्षित सीटों के ज़रिए चुनावों में हेरफेर करके अपनी पसंद की सरकार बनवाता है, जो स्थानीय जनता के बजाय पाकिस्तान के इशारों पर काम करती है।
आंदोलन और दमन के आरोप
PoK में 5 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन लगातार तेज़ होते गए, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए। उनका यह भी दावा है कि मृतकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी की प्रमुख मांगों को पूरा न करने से जनता का असंतोष और बढ़ गया है।
यह रिपोर्ट पाकिस्तान के उस दावे पर भी सवाल उठाती है, जिसमें वह खुद को कश्मीरी मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी बताता है। रिपोर्ट कहती है कि जो पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का समर्थक होने का दावा करता है, उसे उसी क्षेत्र में नागरिकों की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इनपुट: IANS



