इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री: NHRC ने मेटा की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल, मंत्रालयों से जवाब तलब
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) तक पहुंच आसान बनाने के गंभीर आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख़्त रुख़ अपनाया है। इस…
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) तक पहुंच आसान बनाने के गंभीर आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख़्त रुख़ अपनाया है। इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए, आयोग ने मेटा (इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) की भूमिका को सिर्फ़ एक मध्यस्थ (intermediary) से बढ़कर एक संपादक और प्रकाशक के तौर पर देखने की ज़रूरत पर सवाल उठाए हैं।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, NHRC की प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से दो हफ़्तों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने को कहा है। यह पूरा मामला बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें खुलासा किया गया था कि इंस्टाग्राम पर 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल कर पेड विज्ञापन दिखाए जा रहे थे।
क्या हैं आरोप?
रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि ये विज्ञापन, जो मेटा के अपने रिव्यू सिस्टम से पास हो गए थे, यूज़र्स को सीधे टेलीग्राम चैनलों तक ले जा रहे थे। इन चैनलों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी वीभत्स सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जा रही थी। चिंताजनक बात यह है कि शिकायत किए जाने के बावजूद ये विज्ञापन तब तक सक्रिय रहे, जब तक कि बीबीसी ने विशेष रूप से इस मामले को मेटा के संज्ञान में नहीं लाया।
सिर्फ़ आपत्तिजनक सामग्री नहीं, संगठित अपराध का मामला
NHRC ने स्पष्ट किया है कि यदि ये आरोप साबित होते हैं, तो यह केवल ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री का मामला नहीं है। बेंच के मुताबिक, इसमें बच्चों का यौन शोषण, ऐसी सामग्री की रिकॉर्डिंग, उसका प्रसार, प्रचार और उससे कमाई करना शामिल है, जो एक संभावित संगठित आपराधिक गतिविधि की ओर इशारा करता है। आयोग ने पॉक्सो एक्ट 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत गहन जांच पर ज़ोर दिया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखना, दोषियों की पहचान करना, वित्तीय लेन-देन का पता लगाना और पीड़ित बच्चों का बचाव व पुनर्वास शामिल है।
मेटा की भूमिका पर अहम सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू मेटा की भूमिका को लेकर उठाया गया है। NHRC ने कहा है कि जब कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय रूप से कंटेंट बनाने, उसे बदलने, क्यूरेट करने, प्रचारित करने या उससे कमाई करने में मदद करता है, तो क्या उसे केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ माना जा सकता है? आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से यह जांच करने को कहा है कि क्या मेटा इन गतिविधियों के कारण आईटी नियम, 2021 के तहत एक 'प्रकाशक' के दायरे में आता है और उसकी नियामक जवाबदेही क्या होनी चाहिए।
विभिन्न एजेंसियों को कड़े निर्देश
आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय से पॉक्सो एक्ट की धारा 19 के तहत अपराध की अनिवार्य रिपोर्टिंग के पालन पर विशेष जवाब मांगा है। दिल्ली पुलिस को भी मामले में की गई कार्रवाई और टेलीग्राम से मांगी गई जानकारी पर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। NHRC ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उनकी रिपोर्ट विशिष्ट और बिंदुवार होनी चाहिए, न कि सामान्य या गोलमोल।
इनपुट: IANS



