नेपाल बाढ़ त्रासदी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दूतावास पहुंचकर भारत की ओर से संवेदना व्यक्त की
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण हुई भारी जान-माल की हानि पर भारत ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसी कड़ी में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास पहुँचे और…
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण हुई भारी जान-माल की हानि पर भारत ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसी कड़ी में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास पहुँचे और शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर भारत सरकार और यहाँ की जनता की ओर से अपनी भावनाएं प्रकट कीं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस यात्रा की जानकारी साझा की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास के प्रयासों में हर संभव मदद करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
भारत की ओर से सक्रिय मदद
बाढ़ के बाद से ही भारत लगातार नेपाल को सहायता मुहैया करा रहा है। हाल ही में, बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद करने के लिए 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू भेजी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है।
इसके अतिरिक्त, एक भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग जलविद्युत परियोजनाओं में नेपाल सेना के खोज एवं बचाव कार्यों में सहयोग किया। इन परियोजनाओं में अभी भी लगभग 898 कर्मचारी फंसे हुए हैं।
त्रासदी का भयावह आँकड़ा
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा सोमवार सुबह 9 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 903 शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे अधिक 272 शव दक्षिणी चितवन जिले में मिले हैं, जहाँ प्रशासन ने बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए देवघाट में शवों को दफना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी 4,247 लोग लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में स्थित विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के 933 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारी भारतीय और चीनी विशेषज्ञों की मदद से बचाव अभियान चला रहे हैं।
इनपुट: IANS



