सेबी का बड़ा कदम: अब निवेशक खुद जांच सकेंगे नोटिस असली है या फर्जी, जानिए पूरी प्रक्रिया
निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक अहम सुरक्षा कवच तैयार किया है। अब कोई भी व्यक्ति आसानी से यह पता लगा सकता है कि सेबी के नाम पर मिला कोई पत्र या नोटिस असली है या…
निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक अहम सुरक्षा कवच तैयार किया है। अब कोई भी व्यक्ति आसानी से यह पता लगा सकता है कि सेबी के नाम पर मिला कोई पत्र या नोटिस असली है या किसी ठग की चाल। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी ने इसके लिए अपने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सिस्टम (DNVS) को अपग्रेड किया है, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
यह नया और बेहतर सिस्टम सितंबर 2026 से लागू कर दिया गया है। पहले सिर्फ पत्र के 'आउटवर्ड नंबर' से वेरिफिकेशन होता था, जिसका धोखेबाज गलत फायदा उठा सकते थे। वे किसी असली आउटवर्ड नंबर को अपने फर्जी नोटिस पर छापकर निवेशकों को गुमराह कर सकते थे। लेकिन अब ऐसा करना लगभग नामुमकिन होगा।
कैसे काम करेगा नया वेरिफिकेशन सिस्टम?
अगर आपको सेबी के नाम पर कोई फिजिकल लेटर, नोटिस या कारण बताओ नोटिस मिलता है, तो आप उसकी प्रामाणिकता की जांच सेबी की वेबसाइट पर जाकर कर सकते हैं। इसके लिए आपको पांच जानकारियां दर्ज करनी होंगी:
- आउटवर्ड नंबर: पत्र पर लिखा यूनिक नंबर
- अधिकारी का नाम: पत्र जारी करने वाले का नाम
- जारी होने की तारीख: जिस दिन पत्र जारी हुआ
- पत्र का विषय (Subject Matter): यह एक नया और अनिवार्य कॉलम है
- प्राप्तकर्ता का नाम: जिसके नाम पर पत्र है
यदि ये सभी पांचों जानकारियां सेबी के रिकॉर्ड से मेल खाती हैं, तो सिस्टम तुरंत पुष्टि कर देगा कि दस्तावेज़ असली है। अगर स्क्रीन पर 'नो रिकॉर्ड फाउंड' (No Record Found) का मैसेज आता है, तो आप ईमेल के जरिए सेबी से संपर्क कर सकते हैं। सेबी ने यह भी साफ किया है कि यह सिस्टम सिर्फ पत्र के असली होने की पुष्टि करता है, उसके अंदर लिखी बातों की नहीं। सितंबर 2026 से पहले जारी हुए पत्रों का सत्यापन पुराने तरीके से यानी ईमेल के जरिए ही होगा।
स्टॉक ब्रोकर्स के लिए 'प्रोजेक्ट जागरूक'
फर्जी दस्तावेजों पर लगाम कसने के अलावा, सेबी ने 'प्रोजेक्ट जागरूक' के तहत निवेशकों को शिक्षित करने की भी पहल की है। इसके लिए स्टॉक ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप्स पर निवेशक जागरूकता से जुड़े संदेश दिखाने होंगे। इस बारे में 1 अक्टूबर 2026 को एक सर्कुलर जारी किया गया था।
इसे दो चरणों में लागू किया जा रहा है:
- पहला चरण (5 से 31 अक्टूबर 2026): सभी ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट पर सेबी का जागरूकता संदेश और रिस्क डिस्क्लोजर दिखाना होगा। इस दौरान ऐप पर दिखाना वैकल्पिक है।
- दूसरा चरण (1 नवंबर 2026 से): ब्रोकर्स को वेबसाइट के लैंडिंग पेज (खुलते ही दिखने वाला पहला पेज) और ट्रेडिंग ऐप, दोनों पर यह संदेश दिखाना अनिवार्य हो जाएगा। ऐप पर एक दिन जागरूकता संदेश और अगले दिन रिस्क डिस्क्लोजर बारी-बारी से दिखाया जाएगा।
वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026 से पहले उठाए गए इन दोनों कदमों का मकसद निवेशकों को धोखेबाजों से बचाना और उन्हें बाजार के जोखिमों के प्रति सतर्क करना है।
इनपुट: IANS



