राजकोट: डॉक्टर से ₹58.5 लाख की ठगी, 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में अहमदाबाद से दो गिरफ्तार
गुजरात के राजकोट में एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे 58.5 लाख रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राजकोट शहर की साइबर…
गुजरात के राजकोट में एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे 58.5 लाख रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राजकोट शहर की साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर अहमदाबाद से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों ने साइबर अपराधियों को कमीशन के बदले अपनी कंपनी के बैंक खातों का इस्तेमाल करने दिया था। इन्हीं खातों के जरिए डॉक्टर से ठगी गई रकम को ट्रांसफर किया गया। तकनीकी विश्लेषण और बैंक से मिली जानकारी के आधार पर यह गिरफ्तारी संभव हो सकी।
कौन हैं आरोपी?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 34 वर्षीय दर्शन मकवाना और 29 वर्षीय शुभम परमार के रूप में हुई है। दर्शन मकवाना अहमदाबाद के इसानपुर इलाके का रहने वाला है और मूल रूप से धोलेरा तालुका के भांगढ़ गांव का है। वहीं, शुभम परमार भावनगर का निवासी है और मूलतः बोटाद का रहने वाला है। पुलिस ने इनके पास से 1.20 लाख रुपये कीमत के चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया है।
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' का पूरा मामला?
यह जांच तब शुरू हुई जब एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मामलों में ठग खुद को पुलिस या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। वे किसी झूठी जांच या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित को घर में ही बंधक जैसा महसूस कराते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
इस मामले में सिटी पुलिस कमिश्नर ब्रजेशकुमार झा और एडिशनल पुलिस कमिश्नर चैतन्य मांडलिक समेत अन्य अधिकारियों की देखरेख में टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, ओटीपी या पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें और धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
इनपुट: IANS



