बलूचिस्तान में बाढ़ के चार साल: सरकारी वादे अधूरे, हज़ारों परिवार अब भी स्थायी घर की राह में
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 2022 की विनाशकारी बाढ़ को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन हज़ारों प्रभावित परिवारों के लिए आपदा अब तक ख़त्म नहीं हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 2022 की विनाशकारी बाढ़ को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन हज़ारों प्रभावित परिवारों के लिए आपदा अब तक ख़त्म नहीं हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुके घरों के बीच ये परिवार अब भी एक स्थायी छत का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया या तो ठप है या उसका स्वरूप बदल दिया गया है।
यह स्थिति प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के उस वादे पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसमें उन्होंने बाढ़ में अपना घर खोने वाले हर परिवार को आपदा-रोधी मकान देने का आश्वासन दिया था। ‘मालदीव्स इनसाइट’ की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधूरे पुनर्वास और सरकारी जवाबदेही को लेकर लगातार चिंताएँ बढ़ रही हैं।
विश्व बैंक की परियोजना और घटाया गया दायरा
बाढ़ के बाद पुनर्वास के लिए विश्व बैंक ने मई 2023 में 'इंटीग्रेटेड फ्लड रेजिलिएंस एंड अडैप्टेशन प्रोजेक्ट' (IFRAP) के लिए 213 मिलियन डॉलर की राशि स्वीकृत की थी। शुरुआत में इस परियोजना के तहत लगभग 35,100 मकान मालिकों को आपदा-रोधी घर बनाने में मदद देने की योजना थी। सहायता के लिए कुल 1.34 लाख से ज़्यादा बाढ़ प्रभावित परिवारों का सत्यापन भी किया गया था।
हालांकि, जून 2026 में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती की अध्यक्षता वाली एक समिति ने आवास कवरेज को घटाकर लगभग 69,000 घरों तक सीमित करने का निर्णय लिया।
बुनियादी ढाँचे पर खर्च, आवास योजना प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने आवास योजना का दायरा बढ़ाने के लिए विश्व बैंक से 180 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी। इसके बजाय, उपलब्ध धन को सड़क और सिंचाई जैसी अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की ओर मोड़ दिया गया। इस फैसले का सीधा असर उन हज़ारों सत्यापित परिवारों पर पड़ा है, जो मूल योजना के तहत घर मिलने की उम्मीद कर रहे थे।
गौरतलब है कि 2022 की बाढ़ ने पाकिस्तान के बड़े हिस्से को प्रभावित किया था, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और कमजोर सामाजिक-आर्थिक ढांचे के कारण बलूचिस्तान पर इसका असर सबसे ज़्यादा गंभीर था। जनवरी 2023 में जिनेवा सम्मेलन में पाकिस्तान ने पुनर्वास के लिए 9 अरब डॉलर से ज़्यादा की अंतरराष्ट्रीय सहायता हासिल की थी, लेकिन प्रशासनिक फैसलों के कारण बलूचिस्तान में आपदा-रोधी आवास का वादा अधूरा ही नज़र आ रहा है।
इनपुट: IANS



