राजस्थान: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में बड़ा साइबर फ्रॉड, तीन गिरफ्तार, 50 से ज़्यादा ATM कार्ड बरामद
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में पुलिस ने एक ऐसे अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में काम कर रहा था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह…
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में पुलिस ने एक ऐसे अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की आड़ में काम कर रहा था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर ग्रामीणों से किराए पर बैंक खाते लेकर करोड़ों के अवैध लेनदेन को अंजाम दे रहा था। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी मामूली रकम का लालच देकर ग्रामीणों और अन्य लोगों के बैंक खाते हासिल कर लेते थे। इन खातों को बाद में 'म्यूल अकाउंट' के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जिनमें साइबर धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा जमा और ट्रांसफर होता था। पुलिस का मानना है कि पीड़ितों को ऑनलाइन गेमिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर फंसाया जाता था और फिर अवैध रकम को इन किराए के खातों के जरिए घुमाया जाता था।
छापेमारी और बड़ी बरामदगी
डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) के इस संयुक्त अभियान को एसपी प्यारेलाल शिवरान के निर्देश पर अंजाम दिया गया। पुलिस को 30 सितंबर को सूचना मिली थी कि कोलिया गांव में एक घर के पीछे बने कमरे से अवैध ऑनलाइन गेमिंग का संचालन हो रहा है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने मौके पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को धर दबोचा। इनकी पहचान कोलिया निवासी दिनेश जेवालिया (32) और घनश्याम जेवालिया (22) तथा चिंडालिया निवासी गिरधारी थालोड (26) के रूप में हुई है। मौके से 96,820 रुपये नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 10 चेक बुक, 10 बैंक पासबुक और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद हुए।
जांच का दायरा बढ़ा
आरोपी लेन-देन के लिए फर्जी सिम कार्ड और व्हाट्सएप, टेलीग्राम व फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने एक डायरी भी जब्त की है, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी और सट्टेबाजी से जुड़े बड़े लेनदेन का हिसाब-किताब दर्ज है। पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क के पूरे विस्तार का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
इनपुट: IANS



