गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
अपराध

घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोप: ED ने दिल्ली-NCR में इंपीरिया ग्रुप के ठिकानों पर की छापेमारी

रियल एस्टेट कंपनी इंपीरिया ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED ने बुधवार को दिल्ली में कंपनी के आठ…

घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोप: ED ने दिल्ली-NCR में इंपीरिया ग्रुप के ठिकानों पर की छापेमारी
(फोटो: IANS)

रियल एस्टेट कंपनी इंपीरिया ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED ने बुधवार को दिल्ली में कंपनी के आठ रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई 'इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड' और 'इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड' के साथ-साथ उनके प्रमोटर डायरेक्टरों और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के ठिकानों पर की गई।

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एजेंसी ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह जांच घर खरीदारों से मिली कई शिकायतों और विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई है। कंपनी पर निवेशकों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने, झूठे वादे कर पैसे लगवाने और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा न करने जैसे गंभीर आरोप हैं।

क्या हैं धोखाधड़ी के आरोप?

जांच में पता चला है कि कंपनी ने निवेशकों और घर खरीदारों से मिले करोड़ों रुपयों को दूसरे कामों में लगा दिया। गुरुग्राम के सेक्टर 37 स्थित 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के खरीदारों से मिले पैसे का इस्तेमाल कंपनी ने अपनी दूसरी देनदारियों को चुकाने के लिए किया। आरोप है कि निवेशकों के पैसे को लोन या एडवांस के रूप में संबंधित कंपनियों या लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया।

इसी तरह, 'इंपीरिया माइंडस्पेस' (गुरुग्राम) और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' (ग्रेटर नोएडा) के खरीदारों को हर महीने निश्चित रिटर्न और बाद में लीज रेंटल देने का वादा किया गया था, जिसे कंपनी पूरा करने में नाकाम रही। कई मामलों में तो एक ही यूनिट को कई-कई खरीदारों को बेच दिया गया।

15 साल बाद भी घर नहीं मिला

'इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड' (IWPWL) ने 2011 में 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के लिए बुकिंग शुरू की थी, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी खरीदारों को अब तक उनके यूनिट का कब्जा नहीं मिला है। जांच में यह बात भी सामने आई कि कंपनी जानबूझकर बायर-बिल्डर एग्रीमेंट (BBA) से बचती थी और सिर्फ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर करती थी, जिसमें यूनिट की पहचान या कब्जा देने की कोई समय-सीमा नहीं होती थी। फिलहाल, यह प्रोजेक्ट दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रहा है।

छापेमारी में क्या मिला?

तलाशी के दौरान ED ने 50.50 लाख रुपए नकद, तीन लग्जरी गाड़ियां और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें प्रॉपर्टी के कागजात, फाइनेंशियल रिकॉर्ड, फंड डायवर्जन की जानकारी और डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। ED के मुताबिक, अब तक की जांच में अकेले 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट में ही खरीदारों से करीब 63 करोड़ रुपए लिए जाने की बात सामने आई है। अन्य प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी की रकम का आकलन किया जा रहा है। ED ने हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा और अविनाश सेठिया समेत अन्य प्रमोटरों के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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