झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला: तलाक के लिए 'मानसिक क्रूरता' के आरोप ठोस सबूतों से साबित करने होंगे
झारखंड हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि सिर्फ एक ही घर में अलग रहने, वैवाहिक संबंधों में दूरी या परिजनों से कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों को तलाक के लिए 'मानसिक क्रूरता'…
झारखंड हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि सिर्फ एक ही घर में अलग रहने, वैवाहिक संबंधों में दूरी या परिजनों से कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों को तलाक के लिए 'मानसिक क्रूरता' का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया कि क्रूरता का आरोप इतना गंभीर होना चाहिए कि पति-पत्नी का साथ रहना असंभव हो जाए, और इसे ठोस, विशिष्ट और विश्वसनीय सबूतों से साबित करना अनिवार्य है।
इस टिप्पणी के साथ, हाई कोर्ट ने रांची फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति द्वारा दायर तलाक की अपील को खारिज कर दिया। फैमिली कोर्ट ने भी पहले पति की तलाक की अर्जी को नामंजूर कर दिया था।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक डॉक्टर पति (डॉ. मयंक) और एक सहायक प्रोफेसर पत्नी (रीमा) से जुड़ा है। दोनों का विवाह 28 जुलाई 2011 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुआ था, जिसके बाद हिंदू रीति-रिवाजों से भी शादी हुई। पति ने विशेष विवाह अधिनियम की धारा 27(1)(डी) के तहत पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था।
पति ने दावा किया था कि पत्नी उनके बीमार माता-पिता से दुर्व्यवहार करती थी, एक ही घर में अलग रहती थी और बातचीत नहीं करती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2012 के बाद से दोनों के बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं थे, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी हुई और उनका करियर प्रभावित हुआ।
अदालत ने आरोपों को क्यों अपर्याप्त माना?
अदालत ने पाया कि वैवाहिक जीवन में होने वाले सामान्य मतभेद, छोटी-मोटी परेशानियां या स्वभाव का मेल न खाना अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं है। पति द्वारा लगाए गए आरोपों को अदालत ने सामान्य और अस्पष्ट माना। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की समीक्षा करने पर कोई ऐसी विशिष्ट घटना या ठोस सबूत सामने नहीं आया, जिससे पत्नी के व्यवहार को गंभीर मानसिक क्रूरता माना जा सके।
इसके विपरीत, पत्नी ने इन आरोपों का खंडन किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने शादी के लिए 10 लाख रुपये दिए थे और इसके बावजूद उनसे पैसे की मांग की जाती रही। उन्होंने पति की पढ़ाई के लिए कर्ज लेने और ससुराल की देखभाल करने का भी दावा किया। पत्नी ने पति के खिलाफ प्रताड़ना का मामला भी बरियातू थाने में दर्ज कराया था और अदालत में कहा कि वह अब भी उनके साथ रहना चाहती हैं।
इनपुट: IANS



