तारा कोल ब्लॉक नीलामी: भूपेश बघेल ने साय सरकार से पूछा - किसके दबाव में बदला फैसला?
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की विष्णु देव साय सरकार पर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी और लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बघेल ने आरोप लगाया है…
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की विष्णु देव साय सरकार पर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी और लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बघेल ने आरोप लगाया है कि उनकी सरकार ने जिस हसदेव अरण्य क्षेत्र की खदानों को पर्यावरण और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए नीलामी से बाहर करवाया था, उसे वर्तमान सरकार ने दोबारा खुलवा दिया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अंबिकापुर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री साय से पूछा कि उन्होंने दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तारा कोल ब्लॉक को नीलामी में फिर से शामिल करने का आग्रह किसके दबाव में किया। बघेल ने याद दिलाया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में, हसदेव के घने जंगलों और स्थानीय समुदायों पर खनन के दुष्प्रभावों को देखते हुए केंद्र से नीलामी रोकने का अनुरोध किया गया था।
हसदेव अरण्य और कोल ब्लॉक का मुद्दा
भूपेश बघेल ने कहा, “भारत सरकार से नौ कोल ब्लॉक नीलामी से बाहर करने के लिए हमने पत्र लिखा था। उसके बाद कोल मंत्री यहां आए थे... हम लोगों ने आग्रह किया था कि जंगल है इसलिए यहां खुदाई नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद ही केंद्र ने तारा समेत कुछ ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से हटाया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी मांग पर भारत सरकार ने कुल 40 खदानों को डीनोटिफाई किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर निशाना साधते हुए कहा, “अब सवाल ये उठता है कि विष्णु देव साय जो अपने आप को आदिवासियों का नेता कहते हैं... तो आप उसके विनाशक कैसे बन गए?”
CGPSC भर्ती पर भी उठाए सवाल
कोल ब्लॉक के अलावा, भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में सही और गलत जवाब लिखने वाले परीक्षार्थियों को एक जैसे अंक दिए गए हैं। बघेल ने कहा कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत के तौर पर उत्तर पुस्तिकाएं भी दिखाई थीं और इंटरव्यू रोकने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इंटरव्यू तो स्थगित कर दिया है, लेकिन मामले में जांच के आदेश अभी तक नहीं दिए हैं।
इनपुट: IANS



