सोमवार, 29 जून 2026 · नई दिल्ली
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BCCI लोकपाल का बड़ा फैसला: 9 साल की सीमा पार करने पर KSCA सचिव संतोष मेनन पद से बाहर

कर्नाटक क्रिकेट की राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) के मानद सचिव संतोष मेनन को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई बीसीसीआई के संविधान में निर्धारित अधिकतम

BCCI लोकपाल का बड़ा फैसला: 9 साल की सीमा पार करने पर KSCA सचिव संतोष मेनन पद से बाहर
(फोटो: IANS)

कर्नाटक क्रिकेट की राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) के मानद सचिव संतोष मेनन को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई बीसीसीआई के संविधान में निर्धारित अधिकतम कार्यकाल सीमा के उल्लंघन के आधार पर की गई है।

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IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश बीसीसीआई लोकपाल जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने जारी किया। केएससीए के संस्थागत सदस्य डॉल्फिन क्रिकेटर्स ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे लोकपाल ने सही ठहराया।

9 साल की सीमा बनी हटाने की वजह

बीसीसीआई के संविधान के नियम 3(बी)(आई) के अनुसार कोई भी पदाधिकारी प्रशासन में कुल 9 वर्ष से अधिक नहीं रह सकता। कूलिंग ऑफ नियमों के तहत संतोष मेनन का यह कार्यकाल 16 दिसंबर 2025 को पूरा हो गया — जिसमें ऑफिस बेयरर और प्रबंधन समिति सदस्य के रूप में बिताया गया कुल समय शामिल है।

अपने फैसले में जस्टिस मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "रेस्पोंडेंट नंबर 3, संतोष मेनन, केएससीए के संविधान के नियम 1ए (एचएच) के तहत तय पद पर 9 साल से हैं, इसलिए, वह 16.12.2025 से केएससीए के मानद सचिव का पद संभालने के लिए साफ तौर पर अयोग्य हैं। वह गैर-कानूनी तरीके से सचिव का पद हड़प रहे हैं और अब 9 साल पूरे होने पर केएससीए में कोई पद नहीं रख सकते। बीसीसीआई की 23.08.2025 की सलाह को गैर-कानूनी तरीके से नजरअंदाज किया गया है, जो बीसीसीआई, केएससीए के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट की सही व्याख्या के आधार पर सही पाई गई है।"

प्रस्ताव वापसी पर भी उठे सवाल

जस्टिस मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि मेनन ने वेंकटेश प्रसाद के नेतृत्व वाले गुट के साथ पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव जीतने के बाद सचिव पद संभाला था। उन्हें 7 दिसंबर 2025 को इस पद पर चुना गया था।

लोकपाल ने अपने आदेश में कहा, "यह साफ है कि 14 अक्टूबर, 2025 का पिछला प्रस्ताव, रेस्पोंडेंट नंबर 3 ने पद संभालने के 9 दिनों के अंदर ही बहुत जल्दबाजी में वापस ले लिया था। ठीक उसी दिन, रेस्पोंडेंट नंबर 3 को डिसक्वालिफाई होने से बचाने के लिए, 14.10.2025 के प्रस्ताव के खिलाफ एक नया प्रस्ताव पास किया गया। ऐसी संस्थाओं के लिए इतने कम समय में यू-टर्न लेते हुए ऐसा प्रस्ताव पास करना ठीक नहीं है।"

पद खाली, तत्काल अनुपालन के आदेश

फैसले के बाद लोकपाल ने केएससीए सचिव का पद आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित कर दिया। साथ ही केएससीए और बीसीसीआई दोनों को इस आदेश को बिना देरी के लागू करने के निर्देश दिए गए।

जस्टिस मिश्रा ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि केएससीए के ओम्बड्समैन द्वारा 5 फरवरी 2025 को दिया गया स्पष्टीकरण केएससीए नियमों के नियम 41 के तहत कोई बाध्यकारी आदेश नहीं है और इस विवाद के निर्णय पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाता।

उन्होंने अंत में कहा, "रेस्पोंडेंट नंबर 03 ने केएससीए में 16.12.2025 को ज्यादा से ज्यादा '9' साल का समय पूरा कर लिया है। वह केएससीए के मानद सचिव के तौर पर बने रहने के हकदार नहीं हैं। पद खाली घोषित किया जाता है। बीसीसीआई और केएससीए इस आदेश को तुरंत लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।"

इनपुट: IANS

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