मानसून की धीमी चाल का असर: इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में कमी दर्ज
कमजोर मानसून के प्रभाव के कारण इस साल देश में खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले धीमी रही है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई तक कुल 658.19 लाख…
कमजोर मानसून के प्रभाव के कारण इस साल देश में खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले धीमी रही है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई तक कुल 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खरीफ फसलें बोई गई हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के इन आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग सभी प्रमुख खरीफ फसलों के रकबे में गिरावट आई है। धान की बुवाई 166.41 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 167.83 लाख हेक्टेयर से मामूली कम है। इस गिरावट का एक बड़ा कारण अल नीनो के मौसमी प्रभाव को माना जा रहा है।
अनाज और दालों की बुवाई भी प्रभावित
आंकड़ों के मुताबिक, दालों और मोटे अनाज की बुवाई पर भी असर पड़ा है। उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों का रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसी तरह, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज (श्री अन्न) का बुवाई क्षेत्र भी 127.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। गन्ने की खेती का रकबा भी इस साल 119.03 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 134.09 लाख हेक्टेयर था।
किसानों को राहत देने के लिए MSP में बढ़ोतरी
बुवाई के इन आंकड़ों के बीच सरकार ने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
यह फैसला केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें उत्पादन लागत पर कम से कम 1.5 गुना एमएसपी देने का लक्ष्य रखा गया था। इस वृद्धि के बाद, उत्पादन लागत की तुलना में किसानों को सबसे अधिक 61% का अनुमानित लाभ मूंग पर मिलेगा। इसके बाद बाजरा और मक्का पर 56-56 प्रतिशत और तूर (अरहर) पर 54 प्रतिशत का लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार की नीति हाल के वर्षों में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी देने की रही है।
इनपुट: IANS



