भारत-सऊदी अरब संबंध: अजित डोभाल के रियाद दौरे में सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता पर हुई अहम चर्चा
मध्य-पूर्व में बदलते समीकरणों और वैश्विक ऊर्जा संकट की चिंताओं के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने सऊदी अरब का एक महत्वपूर्ण दौरा किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार…
मध्य-पूर्व में बदलते समीकरणों और वैश्विक ऊर्जा संकट की चिंताओं के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने सऊदी अरब का एक महत्वपूर्ण दौरा किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को रियाद पहुंचे डोभाल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करना और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करना था। रियाद में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को एक्स (X) पर इस यात्रा की जानकारी और तस्वीरें साझा कीं।
दूतावास द्वारा साझा की गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि रियाद हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। स्वागत करने वालों में सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के उपमंत्री डॉ. सऊद अल-साती और भारत में सऊदी राजदूत डॉ. सुहैल खान शामिल थे।
उच्च स्तरीय बैठकें और प्रमुख मुद्दे
अपनी यात्रा के दौरान, NSA डोभाल ने सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अपने समकक्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसाएद अल-अइबान से मुलाकात की। इन मुलाकातों में भारत और सऊदी अरब के द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई और मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
बैठकों में आतंकवाद से मुकाबले के लिए समन्वय और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे सुरक्षा सहयोग के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दूतावास ने इस दौरे को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
ऊर्जा सुरक्षा का महत्व
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष और एक कमज़ोर संघर्ष विराम के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारतीय दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, सऊदी अरब भारत को कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और देश की कुल तेल आवश्यकता का लगभग 14% हिस्सा पूरा करता है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक होने के नाते, भारत सऊदी अरब से होने वाली आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए, दोनों देश समुद्री गलियारों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



