शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
संस्कृति

कोणार्क सूर्य मंदिर: अक्टूबर में शुरू हो सकती है सुरंग की खुदाई, ASI और IIT ने की तैयारियों की समीक्षा

ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की एक विशेषज्ञ टीम ने मंदिर में…

कोणार्क सूर्य मंदिर: अक्टूबर में शुरू हो सकती है सुरंग की खुदाई, ASI और IIT ने की तैयारियों की समीक्षा
(फोटो: IANS)

ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की एक विशेषज्ञ टीम ने मंदिर में प्रस्तावित सुरंग की खुदाई के लिए की जा रही तैयारियों का जायजा लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सभी सुरक्षा और मौसम संबंधी जांचें संतोषजनक रहीं, तो खुदाई का यह अहम काम अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकता है।

विज्ञापन

यह निरीक्षण ASI की अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) जान्हवी शर्मा और एक कोर कमेटी के नेतृत्व में किया गया। टीम ने विशेष रूप से उस मेटल फ्रेम के डिजाइन की समीक्षा की, जिसे खुदाई के दौरान सुरंग को सुरक्षित रखने के लिए लगाया जाना है। ASI के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट और रीजनल डायरेक्टर डॉ. मिलन कुमार चौले भी इस दौरान मौजूद थे और उन्होंने साइट के हर पहलू की विस्तृत जानकारी दी।

संरचना की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

डॉ. चौले ने बताया कि इस जटिल कार्य के लिए IIT को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। IIT ने संरचना में पड़ने वाले संभावित दबाव का आकलन करने के लिए 2D और 3D डिजाइन तैयार किए हैं। उन्होंने कहा, "एक बार जब हम काम शुरू करेंगे तो हमें सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना होगा, इसलिए हमें सुरक्षा पहलुओं को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट होना होगा।" इसी के तहत IIT ने फिलहाल लगभग 2 मीटर गुणा 2.3 मीटर का एक हिस्सा काटने की अनुमति दी है, जिसकी मोटाई करीब 60-70 सेंटीमीटर होगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काम शुरू करने से पहले कई गणनाओं और मौसम की स्थिति, विशेष रूप से बारिश के खत्म होने का इंतजार करना होगा। डॉ. चौले के अनुसार, "अगर गणना गलत हुई तो पूरा आकलन ही गलत हो जाएगा, इसलिए हमें उनके गणना देने का इंतजार करना होगा।"

विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति

इस महत्वपूर्ण परियोजना की निगरानी एक उच्च-स्तरीय कोर कमेटी कर रही है, जिसकी अध्यक्षता ADG जान्हवी शर्मा कर रही हैं। समिति में सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ, IIT चेन्नई और IIT दिल्ली के प्रोफेसर, पुरातत्वविद् और ASI के सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं। टीम ने संरक्षण के चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की और कोणार्क के प्रवेश हॉल के ऊपरी हिस्से का दौरा कर संरचना की स्थिति का आकलन किया।

ब्रिटिश इंजीनियरों के काम की सराहना

निरीक्षण के दौरान एक रोचक तथ्य भी सामने आया। डॉ. चौले ने बताया कि ब्रिटिश इंजीनियरों ने मंदिर की भराई के लिए समुद्री रेत की जगह नदी की रेत का इस्तेमाल किया था, जो एक बहुत अच्छा निर्णय था। उन्होंने कहा, "अगर समुद्री रेत का इस्तेमाल किया गया होता तो पत्थरों पर सफेदी आ जाती और वे बहुत जल्दी खराब हो जाते। नदी की रेत का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए संरचना काफी स्थिर है और अभी भी अच्छी स्थिति में है।"

इनपुट: IANS

N

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से धर्म और संस्कृति से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →