शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

केन-बेतवा परियोजना: रिश्वत कांड के बाद विस्थापितों के मुआवज़े और पुनर्वास की जांच की मांग

मध्य प्रदेश में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवज़े को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पन्ना जिले में एक विस्थापित परिवार से रिश्वत लेते हुए राजस्व कर्मचारी की लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तारी के…

केन-बेतवा परियोजना: रिश्वत कांड के बाद विस्थापितों के मुआवज़े और पुनर्वास की जांच की मांग
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवज़े को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पन्ना जिले में एक विस्थापित परिवार से रिश्वत लेते हुए राजस्व कर्मचारी की लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तारी के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूरी मुआवज़ा और पुनर्वास प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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मामले की जानकारी देते हुए, समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एक राजस्व कर्मचारी को विस्थापित परिवार से 47 हज़ार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। बताया गया है कि कुल 80 हज़ार रुपए की मांग की गई थी, जिसमें से 30 हज़ार रुपए पहले ही ले लिए गए थे।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार से सवाल

इस घटना को आधार बनाते हुए जीतू पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक पटवारी के भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। यह उन 1321 विस्थापित परिवारों के अधिकारों और सरकार की पूरी मुआवज़ा-पुनर्वास व्यवस्था पर सवाल है।" पटवारी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी थी, तो विस्थापितों को उनके हक के लिए रिश्वत क्यों देनी पड़ रही है?

पटवारी ने सरकार के उस दावे को भी रेखांकित किया जो विधानसभा में किया गया था। सरकार ने कहा था कि सर्वे के बाद मुआवज़ा निर्धारण और पुनर्वास में कोई अनियमितता नहीं मिली। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, लोकायुक्त की हालिया कार्रवाई ने सरकार के इस दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि सभी 1321 विस्थापित परिवारों के मुआवज़े और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जीतू पटवारी ने कहा, "विकास के नाम पर विस्थापितों को उनका हक देने के बजाय यदि सरकारी तंत्र रिश्वत मांगता है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब और विस्थापित परिवारों के साथ अन्याय है।" उन्होंने मांग की कि ज़िम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि उनकी सरकार विस्थापितों के साथ है या भ्रष्ट तंत्र के साथ।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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