शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

केन-बेतवा लिंक परियोजना: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्राम सभा से लेकर मुआवज़े तक में गड़बड़ी के आरोप लगाए

मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने छतरपुर जिले के…

केन-बेतवा लिंक परियोजना: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्राम सभा से लेकर मुआवज़े तक में गड़बड़ी के आरोप लगाए
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने छतरपुर जिले के प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद कहा कि 44 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में पहले चरण से ही कई स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।

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शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए सिंघार ने मुआवज़ा वितरण, पुनर्वास, ठेका आवंटन और ग्राम सभा प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को उन्होंने छतरपुर के कूपी गांव जाकर आंदोलन कर रहे प्रभावित लोगों से मुलाकात की थी और उनकी समस्याओं को समझा था।

ग्राम सभा की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

सिंघार का आरोप है कि परियोजना के लिए ग्राम सभा की बैठकों में केवल कागज़ी औपचारिकता निभाई गई। उन्होंने दावा किया कि रतिया, करी, खटवानी, पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी और सुकवाहा जैसी कई ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टर में शब्दशः एक जैसी भाषा लिखी मिली है।

उन्होंने इस बात पर भी संदेह जताया कि अधिकांश ग्राम सभा की बैठकें 17 और 18 फरवरी 2022 को सुबह 11:30 बजे होना दर्ज हैं, जो कि अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर संभव नहीं लगता। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि खरिहानी ग्राम पंचायत के रजिस्टर पर रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर हैं, जबकि उस वक्त उमा मिश्रा सरपंच थीं और रतीराम ने लगभग छह महीने बाद पदभार ग्रहण किया था।

मुआवज़ा वितरण में अनियमितता के आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने प्रभावितों के हवाले से मुआवज़ा वितरण में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि खरिहानी गांव के मकानों के लिए स्वीकृत लगभग 11 करोड़ रुपये के मुआवज़े में से करीब 8 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को दे दिए गए जो या तो गांव से संबंधित नहीं थे या 1980-90 के दशक में ही गांव छोड़ चुके थे। सिंघार के अनुसार, असली प्रभावित परिवारों तक मुआवज़ा पहुंचा ही नहीं।

मुख्यमंत्री को दी आंदोलन स्थल पर बैठक की चुनौती

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के जिले-जिले जाकर कैबिनेट बैठक करने पर तंज कसते हुए कहा, "मुख्यमंत्री जिले-जिले जाकर कैबिनेट बैठकें करते हैं। एक कैबिनेट बैठक केन–बेतवा परियोजना के आंदोलन स्थल पर भी कर लें, जिससे प्रभावितों के दर्द का उन्हें पता चल जाएगा।"

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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