बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कश्मीर में PM पैकेज के तहत कार्यरत पंडित कर्मचारियों को लश्कर-ए-तैयबा की धमकी, सुरक्षा पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में नौकरी कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने…

कश्मीर में PM पैकेज के तहत कार्यरत पंडित कर्मचारियों को लश्कर-ए-तैयबा की धमकी, सुरक्षा पर उठे सवाल
(फोटो: IANS)

प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में नौकरी कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने धमकी भरे पत्र जारी किए हैं, जिनमें इन कर्मचारियों की निजी जानकारियां शामिल होने का दावा किया गया है। समुदाय के लोगों का कहना है कि वे इन धमकियों से डरकर पीछे नहीं हटेंगे और 90 के दशक का डर वापस लौटने नहीं देंगे।

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इन पत्रों में कथित तौर पर कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर, तस्वीरें, और यहां तक कि उनके वाहनों के नंबर और रंग जैसी व्यक्तिगत जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति ने इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आतंकवादियों तक इतनी विस्तृत जानकारी आखिर कैसे पहुंच रही है?

एक महीने में तीसरी धमकी

IANS से बात करते हुए समुदाय के एक सदस्य ने बताया कि यह कोई पहली धमकी नहीं है। उनके अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह में एक धमकी मिली थी, जिसके बाद 23 अगस्त और फिर 25 अगस्त को भी धमकी भरे पत्र सामने आए। एक ही महीने में बार-बार ऐसी घटनाओं ने डर का माहौल पैदा कर दिया है।

पत्रों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों पर आरएसएस और भाजपा के एजेंडे पर काम करने का आरोप लगाया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए समुदाय के प्रतिनिधि ने कहा, "घाटी में काम करने वाले लोग किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं गए हैं। वे रोजगार और अपने परिवारों का पालन-पोषण करने के लिए वहां गए हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के प्रति उनके विश्वास को किसी राजनीतिक संगठन से जोड़ना गलत है और यह भी डर पैदा करने की एक रणनीति है।

विस्थापन के दर्द पर टिप्पणी से नाराजगी

इसी बीच, समुदाय ने कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' के एक एपिसोड में की गई टिप्पणी पर भी नाराज़गी जताई। शो में एक प्रतिभागी शेरोन वर्मा ने समय रैना के बिहारी होने पर किए गए मज़ाक के जवाब में कहा था, "कम से कम, मैंने अपनी मर्जी से अपना राज्य छोड़ा।" इस टिप्पणी को कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द का मज़ाक उड़ाने वाला माना जा रहा है।

समुदाय के सदस्य ने कहा कि 1990 के दशक में अपना घर छोड़ने वालों के दर्द को समझना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर एक चिड़िया का घोंसला भी टूट जाए तो वह बेचैन हो जाती है, जबकि कश्मीरी पंडितों ने अपने घर, संपत्ति और जड़ों से दूर होने का दर्द झेला है।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी ने समुदाय की पीड़ा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है, तो उसे माफी मांगनी चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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