कर्नाटक: कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ BJP का हल्ला बोल, 1 सितंबर से पदयात्रा का ऐलान
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी 1 सितंबर से एक पदयात्रा शुरू करने जा रही है…
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी 1 सितंबर से एक पदयात्रा शुरू करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी जमीन अधिग्रहण योजना समेत कई अन्य नीतियों का विरोध करना है।
यह जानकारी भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) एन. रविकुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह पदयात्रा सिर्फ किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की कई कथित विफलताओं को जनता के सामने लाने के लिए आयोजित की जा रही है।
पदयात्रा के मुख्य मुद्दे
एन. रविकुमार ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, "पदयात्रा में सिर्फ नागेंद्र मुद्दा नहीं है, बल्कि अनेक मुद्दे हैं। केपीएससी का भ्रष्टाचार है। किसानों को एक पैसा भी अभी तक नहीं मिला।" उन्होंने बताया कि गृहलक्ष्मी स्कीम जैसी योजनाओं में भी अनियमितता बरती जा रही है, जिसके तहत महिलाओं को पिछले दो-तीन महीने से 2,000 रुपये की राशि नहीं मिली है।
पैसे के कथित गबन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "2025 फरवरी-मार्च का पैसा भी नहीं डाला गया और 5000 करोड़ रुपए कहां गया, इसका पता नहीं चला। मंत्री बोल रहे हैं कि उन्होंने पैसा डाला है, लेकिन किसी महिला को पैसा नहीं पहुंचा। ऐसे में वह पैसा कहां गया, जो एक महत्वपूर्ण सवाल है।"
भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण पर चिंता
रविकुमार ने सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति को लेकर उसे "पूरी तरह से कमर्शियलाइज्ड सरकार" बताया। उन्होंने आरोप लगाया, "यह जमीनों को हड़पने वाली सरकार है। हजारों एकड़ जमीन लेकर टाउनशिप बनाने का प्लान किया है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं।"
इसके अलावा, बेंगलुरु में पार्कों की 5 प्रतिशत जमीन लेकर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना का भी विरोध किया जा रहा है। उन्होंने शहर में घटती हरियाली और बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे कदम पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हैं।
कानून-व्यवस्था और विकास पर सवाल
पार्टी ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी "बहुत ही खराब" बताया है। रविकुमार के अनुसार, "यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रोफेसरों के पास पढ़ाने का पर्याप्त गुण नहीं है... कोई भी विकास का काम नहीं हो रहा है। ऐसे बहुत सारे मुद्दे हैं, जिसको लेकर हम पदयात्रा कर रहे हैं।"
इनपुट: IANS



