कर्नाटक: भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया मंजूर
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र का मंत्री पद से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस फैसले से संबंधित 29 अगस्त की आधिकारिक अधिसूचना…
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र का मंत्री पद से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस फैसले से संबंधित 29 अगस्त की आधिकारिक अधिसूचना रविवार को मीडिया में जारी की गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल ने यह कदम मुख्यमंत्री की सिफारिश के बाद उठाया है।
यह मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुए 89 करोड़ रुपए के कथित घोटाले से जुड़ा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को एक पत्र के जरिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत से नागेंद्र का इस्तीफा मंजूर करने की सिफारिश की थी, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया। राज्यपाल ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह स्वीकृति दी।
क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
इस पूरे मामले की शुरुआत मई 2024 में हुई, जब निगम के एक अधिकारी ने आत्महत्या कर ली। अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में निगम के फंड को अनधिकृत रूप से ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगाया था। जांच में यह बात सामने आई कि निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम कई अन्य खातों में भेजी गई थी। इस खुलासे के बाद से ही विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा, लगातार मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पहले भी छोड़ना पड़ा था पद
बी. नागेंद्र, जो एक प्रमुख एसटी नेता हैं, को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते दो साल पहले भी पद छोड़ना पड़ा था। उन्होंने जून 2024 में सिद्धारमैया कैबिनेट से इस्तीफा दिया था, जहाँ वे आदिवासी कल्याण मंत्री के तौर पर कार्यरत थे। बाद में, जब कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो बी. नागेंद्र की 3 अगस्त को कैबिनेट में फिर से वापसी हुई। नई सरकार में उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इनपुट: IANS



