झारखंड: एक करोड़ के इनामी नक्सली के अंगरक्षक समेत 16 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस के 'ऑपरेशन नवजीवन' के तहत कुल 16 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। समाचार…
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस के 'ऑपरेशन नवजीवन' के तहत कुल 16 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में छह शीर्ष कमांडर भी शामिल हैं, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इन सभी ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्र और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डाले। इस मौके पर एडीजी मनोज कौशिक, आईजी साकेत सिंह, आईजी पंकज कंबोज, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह और आईजी अनूप बिरथरे समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कौन हैं सरेंडर करने वाले बड़े कमांडर?
आत्मसमर्पण करने वाले छह इनामी कमांडरों में 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव दा, 10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा और पांच-पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल सदस्य अनिल तुरी व सुखलाल बिरंजिया शामिल हैं। इनके अलावा दो-दो लाख के इनामी एरिया कमेटी सदस्य सुदेश होनहागा और रिसिव सोय ने भी हथियार डाले हैं।
इनके साथ आत्मसमर्पण करने वालों में देवान मुर्मू भी है, जिसे एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक माना जाता है। अन्य दस लोगों में संतोष मांझी, जयकांत मुंडा, राजनाथ हांसदा, एतवारी मांझी, सुमित्रा सुरीन, चंपा मंझियाइन, सालमी मुंडा, मुन्नी सुरीन और सीता मुंडा शामिल हैं।
जमा कराए गए हथियार और आपराधिक रिकॉर्ड
इन नक्सलियों ने अपने साथ लाए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षाबलों को सौंप दिए। इनमें 11 आधुनिक हथियार शामिल हैं, जैसे छह इंसास राइफल, दो एके-47, एक एचके-33, एक यूएस कार्बाइन और एक एम-16 राइफल। इसके साथ ही 38 मैगजीन और 1,562 जीवित कारतूस भी जमा कराए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इन 16 लोगों के खिलाफ झारखंड के अलग-अलग जिलों में हत्या, पुलिस पर हमले, लेवी वसूली और विस्फोट जैसी गतिविधियों से जुड़े कुल 425 मामले दर्ज हैं। अकेले संतोष उर्फ बासुदेव दा पर 128 मामले हैं, जबकि चंदन लोहरा पर 78 मामले लंबित हैं।
झारखंड पुलिस का कहना है कि लगातार अभियानों के दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के कारण उग्रवादी हिंसा छोड़ रहे हैं। सरकार की नीति के तहत इन सभी को सामान्य जीवन जीने के लिए आर्थिक सहायता, कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
इनपुट: IANS



