गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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झारखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, एक महीने में 36 मामले, आधे मरीज़ बच्चे और किशोर

झारखंड में पिछले 30 दिनों के भीतर स्वाइन फ्लू (H1N1) संक्रमण के 36 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि इन संक्रमितों में से आधे, यानी 18 मरीज़, बच्चे…

झारखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, एक महीने में 36 मामले, आधे मरीज़ बच्चे और किशोर
(फोटो: IANS)

झारखंड में पिछले 30 दिनों के भीतर स्वाइन फ्लू (H1N1) संक्रमण के 36 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि इन संक्रमितों में से आधे, यानी 18 मरीज़, बच्चे और किशोर हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य महकमे ने सभी प्रमुख अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है।

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स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संक्रमण का एक बड़ा कारण दूसरे राज्यों से यात्रा कर झारखंड लौटने वाले लोग हैं। दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में मौसमी फ्लू के बढ़ते प्रकोप के मद्देनज़र, झारखंड में भी अंतरराज्यीय आवाजाही पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसके तहत एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर निगरानी तेज कर दी गई है और जिला स्तर से रोजाना रिपोर्ट मंगवाई जा रही है।

जांच और इलाज की तैयारी

संक्रमण की सटीक और त्वरित पहचान के लिए रांची के रिम्स और जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में H1N1 व H3N2 वायरस की आधुनिक जांच सुविधा उपलब्ध है। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को संदिग्ध मरीजों की तत्काल पहचान, जांच और उचित इलाज सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पतालों में कम से कम 10-10 अतिरिक्त बेड आरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, इन अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई, जरूरी दवाइयों का स्टॉक, आईसीयू, एचडीयू और विशेषज्ञ डॉक्टरों की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों की सलाह और लक्षण

रिम्स के क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि H1N1 एक इन्फ्लुएंजा वायरस है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से कैंसर, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

चिकित्सकों के अनुसार, तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द इसके मुख्य लक्षण हैं। बच्चों में उल्टी-दस्त भी हो सकते हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और समय पर इलाज से मरीज स्वस्थ हो रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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