गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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नेपाल-चीन सीमा पर तबाही: भूस्खलन का स्रोत नेपाल था, विशेषज्ञों ने की पुष्टि

नेपाल और चीन की सीमा पर 26 अगस्त को भारी तबाही मचाने वाले हिमनद भूस्खलन की उत्पत्ति नेपाल में ही हुई थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के प्रमुख विशेषज्ञों ने उपग्रह से प्राप्…

नेपाल-चीन सीमा पर तबाही: भूस्खलन का स्रोत नेपाल था, विशेषज्ञों ने की पुष्टि
(फोटो: IANS)

नेपाल और चीन की सीमा पर 26 अगस्त को भारी तबाही मचाने वाले हिमनद भूस्खलन की उत्पत्ति नेपाल में ही हुई थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के प्रमुख विशेषज्ञों ने उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों, ज़मीनी सर्वेक्षण और वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। इस आपदा के कारण मिट्टी और चट्टानों का सैलाब चीन की ओर बह गया था, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।

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विशेषज्ञों ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन को इस तरह की आपदाओं का मूल कारण बताया है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे कार्बन उत्सर्जन से हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ़्तार तेज हो रही है, जिससे यह 'तीसरा ध्रुव' कहे जाने वाला क्षेत्र जलवायु आपदाओं के लिए एक उच्च-जोखिम वाला इलाका बन गया है।

आपदा की पुष्टि और चीन की मदद

त्रिभुवन विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. अमृत शर्मा ने सैटेलाइट तस्वीरों और स्थलीय शोध के आधार पर पुष्टि की कि ग्लेशियर का टूटना नेपाल में हुआ था। उन्होंने बताया कि बर्फ की विशाल मात्रा इतनी तेज़ी से खिसकी कि वह सात मिनट से भी कम समय में चीन के चीलोंग पोर्ट तक पहुंच गई, जिससे तटवर्ती इलाकों में चेतावनी देने का समय तक नहीं मिल सका। रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ डॉ. बसंत नेउपाने ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आपदा से प्रभावित होने के बावजूद चीन ने तत्काल नेपाल को सहायता प्रदान की, जो पड़ोसी देशों के बीच सहयोग की सच्ची भावना को दर्शाता है।

आपसी सहयोग का आह्वान

चाइना मीडिया ग्रुप द्वारा साक्षात्कार किए गए इन विशेषज्ञों ने एकमत से राजनीतिक आरोपों से ऊपर उठकर आपदा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चीन और नेपाल को आपदा निवारण एवं शमन में सहयोग को और गहरा करना चाहिए ताकि वे मिलकर अपने साझा हिमालयी घर की रक्षा कर सकें।

इनपुट: IANS

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