बुधवार, 29 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
अपराध

झारखंड: चार दशक से सक्रिय, एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार

झारखंड में सुरक्षाबलों ने इस साल की सबसे बड़ी नक्सल-विरोधी कामयाबी हासिल की है। करीब चार दशकों से सक्रिय और माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया…

झारखंड: चार दशक से सक्रिय, एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

झारखंड में सुरक्षाबलों ने इस साल की सबसे बड़ी नक्सल-विरोधी कामयाबी हासिल की है। करीब चार दशकों से सक्रिय और माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम था और उसकी गिरफ्तारी को राज्य में माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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यह गिरफ्तारी मंगलवार देर रात धनबाद और गिरिडीह जिले के सीमावर्ती इलाके में की गई। खुफिया जानकारी के आधार पर झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन ने एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें मिसिर बेसरा को पकड़ा गया। उसके साथ 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू और एक अन्य सहयोगी गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है।

कैसे मिली कामयाबी?

इस बड़ी सफलता के पीछे की कड़ी मंगलवार को ही रांची में हुए एक आत्मसमर्पण से जुड़ी है। मिसिर बेसरा के करीबी अंगरक्षक देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा ने 15 अन्य माओवादियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था। सुरक्षा एजेंसियों को देवान से ही बेसरा की गतिविधियों और उसके संभावित ठिकाने के बारे में अहम सुराग मिले, जिसके बाद घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया। अभियान के दौरान दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे फिलहाल पूछताछ चल रही है।

कौन है मिसिर बेसरा?

गिरिडीह के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल, माओवादी संगठन के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले पोलित ब्यूरो का सदस्य था। झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट और रंगदारी जैसे 150 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

यह भी पढ़ें: बेसरा को 2007 में खूंटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन 2009 में वह बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर से पुलिस हिरासत से भागने में कामयाब हो गया था। तब से वह करीब दो दशकों तक सुरक्षा एजेंसियों की 'मोस्ट वांटेड' सूची में बना हुआ था।

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से झारखंड में माओवादी संगठन का नेतृत्व कमजोर पड़ेगा, जो पहले से ही मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से जूझ रहा है। फिलहाल, केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां मिसिर बेसरा और उसके सहयोगियों से किसी गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। उम्मीद है कि इस पूछताछ से संगठन के नेटवर्क, हथियारों और वित्तीय स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी। पुलिस की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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