जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक: फैसले पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
नई दिल्ली में धरना-प्रदर्शनों के ऐतिहासिक केंद्र जंतर-मंतर को इस सूची से हटाने के गृह मंत्रालय के फैसले ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार की सहयोगी जदयू जहां इसे जनहित में लिया गया…
नई दिल्ली में धरना-प्रदर्शनों के ऐतिहासिक केंद्र जंतर-मंतर को इस सूची से हटाने के गृह मंत्रालय के फैसले ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार की सहयोगी जदयू जहां इसे जनहित में लिया गया फैसला बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी ने सरकार पर डरने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस मामले पर अब कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है और मंत्रालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई है।
विपक्ष का हमला: 'डरी हुई है सरकार'
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने लखनऊ में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन की जगह से हटाने की वजह समझिए। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इतनी डरी हुई है कि वह अपनी संसद से 300 मीटर दूर से उठने वाले विरोध के स्वरों को भी अपने कानों तक नहीं आने देना चाहती।" उन्होंने आगे कहा कि आंख बंद कर लेने से अंधेरा नहीं हो जाता और भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
सरकार का बचाव: 'जनहित में लिया गया फैसला'
वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी जदयू ने सरकार के इस कदम का बचाव किया है। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के अनुसार, यह निर्णय आम लोगों की परेशानियों को कम करने और व्यापार व सरकारी कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा, "वहां लगातार प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों और सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही थी।" रंजन ने यह भी कहा कि मामला अब अदालत में है और न्यायपालिका का जो भी फैसला आएगा, वह सभी को मान्य होगा।
क्या है पूरा मामला?
गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया था। इसके विकल्प के तौर पर दिल्ली में तीन नए स्थानों को प्रदर्शनों के लिए अधिसूचित किया गया है। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं।
इनपुट: IANS



