तीसरे मोर्चे की सियासत? CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर स्टालिन के समर्थन से अटकलें तेज़
तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी डीएमके की राष्ट्रीय राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावना तलाशने की अटकलें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। यह चर्चा तब शुरू हुई जब पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के.…
तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी डीएमके की राष्ट्रीय राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावना तलाशने की अटकलें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। यह चर्चा तब शुरू हुई जब पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं की दिल्ली में हुई गिरफ्तारी की निंदा करते हुए उन्हें समर्थन देने की पेशकश की।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने पूछा कि सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर सकती है और कितनी युवा आवाज़ों को दबा सकती है। स्टालिन ने डीएमके की तरफ से गिरफ्तार नेताओं को हर संभव कानूनी सहायता देने का आश्वासन भी दिया। इस समर्थन के लिए CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्टालिन का आभार व्यक्त किया।
राजनीतिक संकेत और गठबंधन की तलाश
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को डीएमके की उस रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसके तहत वह भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधनों से अलग एक नया मोर्चा बनाने की कोशिश में है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद डीएमके के लिए राज्य में गठबंधन के विकल्प सीमित हो गए हैं। एक तरफ एआईएडीएमके का भाजपा के साथ गठबंधन है, तो वहीं कांग्रेस, चुनाव जीतने वाले टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होकर दो मंत्री पद हासिल कर चुकी है।
इससे पहले भी तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को लेकर डीएमके की उप महासचिव कनिमोझी ने तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। हालांकि, उन मुलाकातों से अब तक कोई ठोस राजनीतिक व्यवस्था नहीं बन पाई है।
क्या था गिरफ्तारी का मामला?
CJP के नेता दिल्ली में मतदाता सूची के एसआईआर (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर लिया था। स्टालिन ने अपने बयान में कहा कि डीएमके गिरफ्तार CJP पदाधिकारियों के साथ खड़ी है और इस तरह की कार्रवाइयों से और अधिक विरोध प्रदर्शन होंगे, जिसमें आम नागरिक भी सड़कों पर उतरेंगे।
हालांकि, डीएमके का यह समर्थन फिलहाल गिरफ्तारियों और विरोध करने के अधिकार पर केंद्रित है। यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह एकजुटता भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन या समझौते में तब्दील होगी, क्योंकि प्रस्तावित तीसरे मोर्चे की कोई स्पष्ट रूपरेखा या साझा कार्यक्रम अभी तक सामने नहीं आया है।
इनपुट: IANS



