सोमवार, 27 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

इंदौर नगर निगम घोटाला: 103 करोड़ के फर्जी बिल मामले में ED ने 32 आरोपियों पर कसा शिकंजा

मध्य प्रदेश के चर्चित इंदौर नगर निगम (IMC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 103.42 करोड़ रुपये के इस फर्जी बिल घोटाले में 32 आरोपियों के खिलाफ 20,000 से अधिक…

इंदौर नगर निगम घोटाला: 103 करोड़ के फर्जी बिल मामले में ED ने 32 आरोपियों पर कसा शिकंजा
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के चर्चित इंदौर नगर निगम (IMC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 103.42 करोड़ रुपये के इस फर्जी बिल घोटाले में 32 आरोपियों के खिलाफ 20,000 से अधिक पन्नों की अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह शिकायत इंदौर की विशेष पीएमएलए अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रस्तुत की गई है।

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जिन 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें घोटाले से फायदा उठाने वाले ठेकेदार, इंदौर नगर निगम के अधिकारी, स्थानीय फंड ऑडिट और निवासी ऑडिट कार्यालय के अधिकारी समेत कई निजी व्यक्ति शामिल हैं। ईडी का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर अपराध से कमाए गए धन को छिपाने, रखने, अलग-अलग तरीकों से ठिकाने लगाने और उसका इस्तेमाल करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

कैसे हुआ 103 करोड़ का यह घोटाला?

ईडी ने इस मामले की जांच इंदौर के एमजी रोड पुलिस थाने में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में यह बात सामने आई कि एक सुनियोजित साजिश के तहत नगर निगम के खजाने से सार्वजनिक धन की धोखाधड़ी की गई। इसके लिए फर्जी बिल, जाली वर्क ऑर्डर, मनगढ़ंत मेजरमेंट बुक और झूठे काम पूरा होने के सर्टिफिकेट जैसे नकली दस्तावेजों का सहारा लिया गया। कई भुगतान ऐसे कामों के लिए भी कर दिए गए जो या तो कभी हुए ही नहीं, या फिर किसी और वर्क ऑर्डर के तहत पहले ही पूरे हो चुके थे।

अब तक की कार्रवाई और संपत्ति कुर्की

इस मामले में ईडी ने अब तक कुल 59.18 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क, जब्त या फ्रीज की है। इसमें 5 और 6 अगस्त, 2024 को 20 ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान जब्त/फ्रीज की गई 22.04 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है, जिसमें नकदी, बैंक बैलेंस, एफडी और म्यूचुअल फंड निवेश हैं। इसके अलावा, दो अलग-अलग आदेशों के जरिए 37.14 करोड़ रुपये की 52 अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। इन संपत्तियों में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित व्यावसायिक इमारतें, घर, भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं।

मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार

जांच के दौरान ईडी ने इस घोटाले के मुख्य आरोपी माने जा रहे अभय सिंह राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को भी गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों ने अवैध धन के प्रबंधन और मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाई। ईडी ने अदालत से कुर्क की गई संपत्तियों को विधिवत जब्त करने की मांग भी की है। विशेष पीएमएलए अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस और समन जारी कर मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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