इंदौर भागीरथपुरा जल त्रासदी: न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, दूषित पानी से ही हुईं थीं 22 मौतें
मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हुए जल त्रासदी कांड पर न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि वहां मौतों का कारण दूषित पानी ही था। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष…
मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हुए जल त्रासदी कांड पर न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि वहां मौतों का कारण दूषित पानी ही था। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए इंदौर की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इंदौर में पत्रकारों से बात करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि यह घटना देश के सबसे स्वच्छ शहर में नागरिकों को मिलने वाले पेयजल की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की पोल खोलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन इंदौर जैसे बड़े शहर में ऐसी घटना होना बेहद चिंताजनक है।
जांच रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
सिंघार ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित इस न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथपुरा में सप्लाई किया जा रहा पानी वाकई दूषित और इंसानी इस्तेमाल के लिए अनुपयुक्त था। जांच में पाया गया कि सीवेज का पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिल रहा था, जो प्रदूषण का मुख्य कारण बना।
आयोग ने कुल 36 मौतों के मामलों का परीक्षण किया, जिनमें से 22 मौतों का सीधा संबंध दूषित पानी के सेवन से पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जल और सीवरेज सिस्टम की योजना, रखरखाव और निगरानी में गंभीर व्यवस्थागत खामियां थीं।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट ने प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजागर किया है। उन्होंने बताया कि आयोग ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया। यह रिपोर्ट इंदौर जैसे आर्थिक केंद्र में प्रशासनिक संसाधनों के बावजूद हुई विफलता को दर्शाती है।
इनपुट: IANS



