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शिवलिंग पर सरसों का तेल चढाकर पूजन करने का महत्व ?

हिंदू धर्म में शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाना एक महत्वपूर्ण पूजा पद्धति मानी जाती है। इस परंपरा के अनुसार सरसों का तेल चढ़ाने से शत्रुओं का नाश और कार्यों में सफलता मिलने का विश्वास किया जाता है।

शिवलिंग पर सरसों का तेल चढाकर पूजन करने का महत्व ?

भारत में प्रचीन काल से ही भगवान शिव की पूजा की जाती है. इतिहास की खोज के दौरान हडप्पा सभ्यता के स्थलों की खुदाई की गई तो वहां से भी हमें कुछ ऐसी मूर्तियां मिली है. जिन्हें भगवान शिव की मूर्ति कहा जाता है. हिंदू धर्म में शिव लिंग की पूजा करना भगवान शिव की पूजा करना माना जाता है. इसी कारण जो लोग शिव की पूजा करने के तरीकों के बारे में नहीं जानते हैं. उनके मन में कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर पूछा जाता है कि शिव लिंग पर सरसों का तेल चढाकर पूजन करने का महत्व ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

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शिवलिंग पर सरसों का तेल चढाकर पूजन करने का महत्व ?
शिवलिंग

शिवलिंग पर पूजन के दौरान चढ़ाई जाने वाली सामग्री-

जब भी हम भगवान शिव के मंदिर में जाते हैं, तो पूजा के दौरान शिवलिंग पर कई तरह की सामग्री भगवान को अर्पित की जाती है. इसमें प्रमुख की बात करें, तो चंदन , बिल्बपत्र , फूल , छोटा-सफेद वस्त्र , इनके साथ ही शिवलिंग पर द्रव्य पदार्थ भी चढाए जाते हैं. इनमें सरसों का तेल भी लोग बड़ी मात्रा में चढाते हैं. इसके साथ ही जब शिवलिंग पर सरसों का तेल चढाते हैं, तब हमें - ॐ नमः शिवाय और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। इऩ दोनों मंत्रों का 108 बार जाप करना चाहिेएं. इससे हमें शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाने का पूर्णफल मिलता है.

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शिवलिंग पूजा

सरसों का तेल चढ़ाने से फायदा-

जब हम भगवान की पूजा के दौरान तो भी सामग्री भगवान को अर्पित करते हैं, उसके अनुसार हमें उसका फल भी अलग अलग मिलता है. अगर सरसों के तेल की बात करें, तो सरसों का तेल चढ़ाने से हमारे शत्रुओं का नाश होता है. इसके साथ ही हम जो भी काम शुरू करते हैं, उसमें हमें सफलता मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाता है. जिससे हमारे ऊपर भोलेनाथ की कृपा होती है और धीरे-धीरे हमारे सभी कार्य सिद्ध होते चले जाते हैं.

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ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. इसके पीछे का कारण यह है कि भगवान शिव को उनके स्वभाव के कारण ही भोलेनाथ के नाम से भी जाना जाता है. जो भी उनकी सच्चे दिल से पूजा करता है, वह अपने भग्त को सब कुछ बिना मांगे ही दे देते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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