शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
धर्म

हैदराबाद: स्कूल में बच्चों को 'कलमा' याद कराने का आरोप, मानवाधिकार आयोग ने तेलंगाना सरकार से जवाब मांगा

हैदराबाद के एक स्कूल पर हिंदू बच्चों को कथित तौर पर इस्लामी प्रार्थना (कलमा) याद करने का होमवर्क देने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने…

हैदराबाद: स्कूल में बच्चों को 'कलमा' याद कराने का आरोप, मानवाधिकार आयोग ने तेलंगाना सरकार से जवाब मांगा
(फोटो: IANS)

हैदराबाद के एक स्कूल पर हिंदू बच्चों को कथित तौर पर इस्लामी प्रार्थना (कलमा) याद करने का होमवर्क देने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, आयोग ने इसे संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के संभावित उल्लंघन का मामला माना है।

विज्ञापन

यह कार्रवाई 'सेवान्या उत्थान फाउंडेशन' नामक एक संस्था की शिकायत के बाद हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हैदराबाद का एक स्कूल गैर-मुस्लिम छात्रों को भी इस्लामी पाठ याद करने के लिए मजबूर कर रहा है।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने IANS को बताया कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक गंभीर विषय है और संविधान के अनुच्छेद 28(3) के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन हो सकता है। यह अनुच्छेद किसी भी शिक्षण संस्थान में छात्रों को उनकी सहमति के बिना किसी भी धार्मिक निर्देश या पूजा में भाग लेने से बचाता है।

कानूनगो के अनुसार, आयोग ने तेलंगाना सरकार को भेजे नोटिस में पूरे प्रकरण की जांच करने और इस संबंध में की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

अन्य मामलों पर भी आयोग की नजर

इस बीच, प्रियांक कानूनगो ने बच्चों के अधिकारों से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने भारत में नाबालिग की आयु 18 वर्ष ही रखने की वकालत करते हुए कहा, "शारीरिक संबंध बनाने के लिए बच्चों को एक्सपेरिमेंट की वस्तु मानना, भारत के सामाजिक परिवेश के अनुरूप उचित प्रतीत नहीं होता है। यदि बच्चे 15 साल की आयु में इस तरह का एक्सपेरिमेंट करेंगे तो फिर उनका यौन शोषण भी होगा, उनकी ट्रैफिकिंग भी होगी, स्कूलों के बाहर अबॉर्शन सेंटर्स भी खुलेंगे।" उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इन तथ्यों पर विचार करते हुए बच्चों के हित में फैसला करेगा।

इसके अलावा, उन्होंने राजस्थान में सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने से हुई मौतों के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भी आयोग ने नेशनल मेडिकल काउंसिल और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है।

इनपुट: IANS

N

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से धर्म और संस्कृति से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →