अमरनाथ यात्रा: श्रद्धालुओं की संख्या 4 लाख के पार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जताया आभार
इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। 3 जुलाई को शुरू हुई इस पवित्र तीर्थयात्रा में अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या चार लाख का आंकड़ा पार कर गई है…
इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। 3 जुलाई को शुरू हुई इस पवित्र तीर्थयात्रा में अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या चार लाख का आंकड़ा पार कर गई है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस जानकारी की पुष्टि की। सिन्हा श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के चेयरमैन भी हैं, जो इस वार्षिक यात्रा का प्रबंधन करता है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपराज्यपाल ने कहा, "भगवान शिव की कृपा से, पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है और 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने यह पवित्र यात्रा पूरी कर ली है।" उन्होंने आगे बताया कि अब तक कुल 4.14 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और इस दिव्य अनुभव को संभव बनाने वाले सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
यात्रा की वर्तमान स्थिति और मार्ग
तीर्थयात्रा अभी भी पूरे उत्साह के साथ जारी है। रविवार को ही 4,474 यात्रियों का एक और जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से उत्तरी कश्मीर स्थित बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। हालांकि, रास्ते के रखरखाव के कारण दक्षिण कश्मीर के पहलगाम मार्ग से यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है।
श्रद्धालुओं के पास पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो रास्ते होते हैं। एक 14 किलोमीटर का छोटा बालटाल मार्ग है, जिसे तीर्थयात्री एक ही दिन में पूरा कर लेते हैं। दूसरा 47 किलोमीटर लंबा पारंपरिक नुनवान (पहलगाम) मार्ग है, जिसे पूरा करने में चार दिन लगते हैं।
सुरक्षा और यात्रा का समापन
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जम्मू बेस कैंप से निकलने वाले तीर्थयात्रियों को सुरक्षा काफिले के साथ कश्मीर पहुंचाया जाता है। सुरक्षा कारणों से दोनों बेस कैंप के आगे के क्षेत्र को 'नो-फ्लाई जोन' घोषित किया गया है, जिसके चलते इस साल हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।
यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहार के साथ संपन्न होगी। समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा मंदिर में बर्फ से बनी प्राकृतिक संरचना है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव का प्रतीक मानते हैं।
इनपुट: IANS



