सवाल 110 – सर्वाइकल के दर्द से छुटकारा कैसे पा सकते है

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सवाल 110 - सर्वाइकल के दर्द से छुटकारा कैसे पा सकते है

सर्वाइकल एक ऐसी बीमारी है, जिसका बहुत से लोग सामना करते है. हर कोई इस बीमारी से परेशान है. और सभी इसका बीमारी का समाधान ढूंढ़ रहें है. सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के बारें में रीढ़ की हड़डियों से संबंधित समस्या होती है. यह समस्या उन लोगों को होती है, जो लंबे समय तक गर्दन झूकाकर या देर तक कम्प्यूटर में काम करते रहते है. खास तौर से उन नौकरी करने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा होती है.

जो लंबे समय तक बैठ कर आपना काम करता है. यहीं नहीं जो लम्बें समय तक सीधी अवस्था में गर्दन झुकाकर बैठते हैं. तो खुद भी मेरुदण्ड एवं गर्दन व कंधों में दर्द महसूस करते हैं. यह स्पांडिलाइटिक चेंज के कारण होता है.

सर्वाइकल वर्टिब्रा के प्रयोग तथा व्यायाम न करने से दो कशेरुकाओं के बीच की खाली जगह कम होने लगती है. जि‍से स्पांडिलाइटिक चेंज कहा जाता है. इसके कारण उस वर्टिब्रा से जुड़ी मांसपेशियों का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है और गर्दन व उसके आसपास दर्द होने लगता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस जैसी भयानक बीमारी का रूप ले लेता है.

बता दें कि अगर सर्वाइकल की समस्या का इलाज सहीं समय से नहीं कराया गया, तो यह आपके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. अगर इस समस्या का समय रहते सही इलाज नहीं किया गया, तो स्नायुओं पर दबाव और भी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसा होने से कई बार बीमारी खतराक रूप ले लेती है, साथ ही साथ कई बार तो हाथ और उंगलियों में दर्द होने लगता है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि कुछ सावधानियां रखना जरूरी है.

लंबे समय तक एक ही स्थिति में या फिर एक ही अवस्था में बैठकर एंव झुककर काम न करें. समय-समय पर ब्रक लेना भी बहुत जरूरी है. ताकि आपकि मांसपेशियों को राहत मिल सके.
अगर आप आगे की ओर झुककर काम कर रहे हैं तो शाम को कम से कम 5 मिनट पिछे की ओर झुककर व्यायाम करें. यदि आपकी गर्दन में दर्द होता है. तो अस्थि रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर गर्दन का एक्स-रे करा ले.

यदि आप सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस से ग्रसित हो ही गए हैं. तो परहेज के साथ-साथ व्यायाम भी करें. जिससे आपको इसका लाभ होगा. दर्द अधिक रहने पर अल्पकालीन अल्ट्रासोनिक थैरेपी की आवश्यकता पड़ती है, जिसे घर पर आसानी से दिया जा सकता है. डॉक्टर की सलाह लेकर आप इसे कर सकते है.

इस बीमारी में आप पहले दाहिने गाल पर दाईं हथेली लगाएं. और दाहिनी ओर गर्दन घुमाने की कोशिश करें. ऐसे में दाएं हाथ पर दबाव रहेगा और आप उस दबाव के विपरीत दिशा में देखेंगे. ठीक उसी प्रकार बाहिएं गाल पर बायां हाथ लगाएं तथा उपरोक्त अनुसार ही क्रिया करें.

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इसके बाद आप अपने दोनों हथेलियों को माथे पर टिकाकर माथे पर दबाव डालें. और अपने माथे पर अपनी हथेली से दबाव डालें. उसके बाद अब दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर सिर के पीछे के हिस्से पर लगाकर सिर पर आगे की ओर दबाव डालें व उस दबाव के विपरीत सिर को पीछे की ओर दबाएं.