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शेख हसीना का ऐलान: सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास की पटरी पर लौटाने के लिए लौटूंगी

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल के अंत तक अपने वतन लौटने की घोषणा की है। पिछले दो वर्षों से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहीं हसीना ने कहा कि उनकी वापसी का मकसद सत्ता हासिल करना…

शेख हसीना का ऐलान: सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास की पटरी पर लौटाने के लिए लौटूंगी
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल के अंत तक अपने वतन लौटने की घोषणा की है। पिछले दो वर्षों से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहीं हसीना ने कहा कि उनकी वापसी का मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि देश को फिर से विकास, शांति और स्थिरता के रास्ते पर लाना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को ऑडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही।

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अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा, "मैं सिर्फ एक उद्देश्य से बांग्लादेश लौटना चाहती हूं, लोगों के साथ खड़े होने और उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता ही सारी ताकत का स्रोत है और उन्हें अपने लोगों पर पूरा विश्वास और भरोसा है। उन्होंने कहा, "मैं उनके पास जरूर लौटूंगी।" हालांकि, उन्होंने अपनी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई।

छात्र आंदोलन और मौजूदा सरकार पर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई बार भावुक हुईं शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठित समूहों ने अपने राजनीतिक मकसद के लिए इस आंदोलन का इस्तेमाल किया और सुधार की शांतिपूर्ण मांग को हिंसा का माध्यम बना दिया। उन्होंने कहा, "यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। शुरुआत से ही मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की।"

शेख हसीना के अनुसार, उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की हरसंभव कोशिश की थी। उन्होंने कहा, "मैंने खुद छात्रों से बातचीत की पहल की थी। उन्हें प्रधानमंत्री आवास आने का निमंत्रण दिया था। तीन मंत्रियों ने भी उनके साथ चर्चा की थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण सुधार के इस आंदोलन को योजनाबद्ध तरीके से उनके इस्तीफे की एक-सूत्रीय मांग में बदल दिया गया।

'तकलीफ में है मेरा प्यारा बांग्लादेश'

पिछले दो वर्षों की घटनाओं को याद करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने 'प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ झेलते हुए' देखा है। उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद देश की स्थिति और खराब होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि 'धांधली वाले' चुनाव के बाद भी लोग आज डर, असुरक्षा और आर्थिक कठिनाइयों के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "मौजूदा बांग्लादेश वैसा नहीं है, जिसे हमने बनाया था और न ही वह बांग्लादेश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी।"

इनपुट: IANS

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