राजस्थान: विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर गुलामी, अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तीन और सदस्य गिरफ्तार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बड़े साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी रैकेट के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने…
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बड़े साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी रैकेट के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने इस मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे अब तक पकड़े गए लोगों की कुल संख्या आठ हो गई है। यह गिरोह भारतीय युवाओं को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अच्छी नौकरी का लालच देकर ले जाता था और फिर वहां चीनी आपराधिक नेटवर्क द्वारा चलाए जा रहे साइबर फ्रॉड में काम करने के लिए मजबूर करता था।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर चलाए जा रहे राज्यव्यापी एंटी-साइबर क्राइम अभियान का हिस्सा है। साइबर क्राइम के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिले इनपुट और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को योजनाबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है।
कैसे फंसाते थे युवाओं को?
जांच में सामने आया है कि आरोपी राजस्थान और अन्य राज्यों के युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रति माह की आकर्षक सैलरी वाली नौकरी का झांसा देते थे। पीड़ितों को कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड जैसे देशों में भेजा जाता था। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते थे। इसके बाद, उन्हें साइबर स्कैम कंपाउंड में बंधक बनाकर रखा जाता था और डिजिटल अरेस्ट स्कैम, नकली निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम और ऑनलाइन जॉब फ्रॉड जैसे अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
कौन हैं नए गिरफ्तार आरोपी?
बुधवार को गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान आरिफ कथत उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज कथत उर्फ माफिया के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं के अनुसार, फिरोज 2025 के अंत में बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया गया था, जहां उसने सोशल मीडिया पर महिला बनकर भारतीय नागरिकों को क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजनाओं में फंसाने की ट्रेनिंग ली। वहीं, कानू सिंह को अप्रैल 2025 में होटल में नौकरी का वादा कर कंबोडिया ले जाया गया, जहां वह खुद इस गिरोह में शामिल हो गया और कमीशन के बदले चार अन्य भारतीयों की भर्ती की। आरिफ कथत नकली फेसबुक और व्हाट्सएप अकाउंट चलाकर पीड़ितों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए उकसाता था।
जांच में मिल रहे अहम सुराग
पुलिस के अनुसार, पहले गिरफ्तार हुए जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि उर्फ माही और अनिल उर्फ डेविल से पूछताछ और जब्त किए गए मोबाइल, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट और वीपीएन रिकॉर्ड की जांच से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांचकर्ता अब मानव तस्करी, साइबर गुलामी और करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े वित्तीय पहलुओं की भी पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से विदेशी नौकरी के प्रस्तावों और ऑनलाइन निवेश को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।
इनपुट: IANS



