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कुबेर भगवान की पूजा कैसे की जाती है

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कुबेर भगवान
कुबेर भगवान

धन की चाहत किसे नहीं होती. आज के समय में इज्जत और सम्मान उसी को मिलता है, जिसके पास धन हो. धन का देवता भगवान कुबेर को माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि जब तक भगवान कुबेर की पूजा नहीं करते तब तक धन की देवी लक्ष्मी जी की प्राप्ति नहीं की जा सकती. ऐसा कहा जाता है कि कुबेर माता लक्ष्मी जी के सेवक हैं और माता लक्ष्मी अपने सेवक के बिना कहीं भी भ्रमण नहीं करती. जब आप भगवान कुबेर की पूजा करेंगे तो वह माता लक्ष्मी जी से आपके घर जाने का आग्रह करेगे और लक्ष्मी माता अपने सेवक का आग्रह कभी नहीं टालतीं, इसलिए कुबेर की पूजा धनतेरस और दिवाली के दिन मुख्य रूप से की जाती है.

कुबेर भगवान

अगर कोई सच्चे दिल से भगवान की पूजा करता है, तो भगवान उसकी मनोकामना जरूरी पूरी करते हैं. लेकिन अगर हमें सही विधि के साथ भगवान की पूजा करते हैं, तो भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं तथा जल्दी ही हमारी सब मुराद पूरी हो जाती है. भगवान कुबेर की पूजा की भी एक विधि निर्धारित की गई है, जिससे कुबेर भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं.

कुबेर भगवान

भगवान कुबेर की पूजा धनतेरस और दिवाली के दिन की जाती है। दिवाली के दिन आपको शाम को भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ कुबेर जी की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए. इसके लिए आप एक साफ चौकी लें और उस पर गंगाजल छिड़कें. इसके बाद उस पर एक लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भी गंगाजल छिड़कें. इसके बाद उस चौकी पर अक्षत डालें और भगवान गणेश मां लक्ष्मी और भगवान कुबरे की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

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प्रतिमा स्थापित करने के बाद अपने आभूषण, पैसे और सभी कीमती चीजें भगवान कुबेर के आगे रखें. इसके बाद अगर आभूषण के डिब्बे पर स्वास्तिक बनाएं या फिर स्वास्तिक बनाकर अपने सभी पैसे और आभूषण उस पर रखें. इसके बाद भगवान कुबेर का तिलक करें और कुबेर जी के साथ- साथ सभी आभूषण और पैसों को अक्षत अर्पित करें. अंत में भगवान कुबेर को हाथ जोड़कर नमन करें और उनसे जाने अनजाने में हुई भूल के क्षमा प्रार्थना करें और उनसे अपना अर्शीवाद सदा बनाने के लिए भी प्रार्थना करें.

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