ईरान परमाणु समझौते के लिए उत्सुक, पर वार्ता विफल होने पर हमले की भी चेतावनी: डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक साथ दो बातें कही हैं। एक ओर उन्होंने दावा किया है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर वॉशिंगटन के साथ एक समझौता करने के लिए "बेहद इच्छुक" है, वहीं दूसरी ओर…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक साथ दो बातें कही हैं। एक ओर उन्होंने दावा किया है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर वॉशिंगटन के साथ एक समझौता करने के लिए "बेहद इच्छुक" है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत विफल रही तो अमेरिकी सेना फिर से हमले शुरू कर सकती है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी एक वर्चुअल कैंपेन रैली और फॉक्स न्यूज को दिए एक अलग इंटरव्यू में की। उन्होंने कहा कि ईरान मूल रूप से यह मान चुका है कि वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता। ट्रंप ने टेनेसी के मतदाताओं से कहा, "उनके (ईरान) पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे और वे यह बात समझते हैं। हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किया है और वे किसी भी तरह डील करना चाहते हैं।"
बातचीत और सैन्य कार्रवाई का विकल्प
फॉक्स न्यूज के साथ अपने साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच "कुछ बहुत अच्छी बातचीत" हुई है। उन्होंने ईरान के उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि परमाणु मामलों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। ट्रंप के मुताबिक, "हमने सिर्फ उसी पर चर्चा की क्योंकि उनके पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे, वे यह समझते हैं।"
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता सैन्य कार्रवाई के बजाय एक समझौता करना है। उन्होंने कहा, "मैं बस इतना चाहता हूं, उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, बस इतनी सी बात है। वे असल में इस बात के लिए मान गए हैं, हमें बस उनसे इसे आधिकारिक करवाना है, लेकिन वे इसके लिए सहमत हो गए हैं।"
हमले की चेतावनी
समझौते को प्राथमिकता देने के बावजूद, ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने इनकार किया तो ईरान के पुलों, बिजलीघरों और अन्य बुनियादी ढांचों पर बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "अगर वे समझौता नहीं करते हैं, तो मैं वापस जाऊंगा और अपना काम पूरा करूंगा।" ट्रंप ने विशेष रूप से 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमला करने की चेतावनी दी, जहां कथित तौर पर ईरान निर्माण कार्य कर रहा है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है और केवल चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 2015 में ईरान और विश्व की छह महाशक्तियों के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था, लेकिन ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इससे अलग कर लिया था।
इनपुट: IANS



