बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
समाज

मेवाड़ माली समाज का इतिहास

माली समाज का नाम संस्कृत शब्द माला से जुड़ा है; मान्यताओं के अनुसार इसकी उत्पत्ति शिव-पार्वती से या बागवानी अपनाने वाले राजपूतों से मानी जाती है।

मेवाड़ माली समाज का इतिहास

इतिहास में किसी भी समाज की उत्पत्ति को लेकर कई मत हो सकते हैं. बशर्त अगर उनकी पुष्टी कोई प्रमाणिक स्त्रोत नहीं करता हो. मेवाड़ के माली समाज के इतिहास के बारे में कोई ठोस जानकारी तो उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन माली समाज के इतिहास और उत्पत्ति को लेकर कई मान्यताएं हैं.

विज्ञापन
OIP 3 1
शिव पार्वती से माली समाज की उत्तत्ति

माली समाज की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द माला से हुई है. एक पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि माली समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के कान में जमा धुल ( कान के मैल ) से हुई है. उसकी इसके अलावा एक मान्यता यह भी है कि एक बार देवी माता पार्वती अपने बगीचे में फूल तोड़ने गई थी. वहां फूल तोड़ते हुए उसके हाथ में एक कांटा लग गया. इससे देवी पार्वती का खून निकलने लगा. उसी खून से माली समाज की उत्तपत्ति हुई तथा वहीं से माली समाज बागवानी के पेशे से जुड़ा.

prithviraj chauhan 3
पृथ्वीराज चौहान राजपूत शासक

इसके अलावा कुछ मान्यताएं ऐसी भी हैं कि माली समाज में एक वर्ग राजपूतों की उपश्रेणियों का भी है. जब हिंदू सम्राट पृथ्वी राज चौहान के पतन के बाद जब मोहम्मद गौरी शक्तिशाली हो गए, तो उन्होनें दिल्ली और अजमेर पर अपना कब्जा कर लिया. बताया जाता है कि काफी राजपूत युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए. कुछ को बंदी बना लिया गया. कुछ राजपूतों ने अपने आप को बचाने के लिए मुस्लिम धर्म अपना लिया. इसके अलावा कुछ राजपूतों ने खेती और बागवानी को अपना पेशा बना लिया. जो बाद में जाकर माली समाज के रूप में सामने आए.  

यह भी पढ़ेें: दिल्ली को मुर्दों का शहर किसने बनाया

इसी माली समाज की एक शाखा बाद में मेवाड़ के माली समाज के रूप में सामने आई.                   

KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →