महाराष्ट्र में सरकारी काम अब होंगे आसान: दफ्तरों के चक्कर खत्म, घर बैठे मिलेंगी सेवाएं
महाराष्ट्र में अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या प्रशासनिक काम निपटाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म होने वाली है। राज्य सरकार ने एक बड़े सुधार की पहल करते हुए सभी विभागों को…
महाराष्ट्र में अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या प्रशासनिक काम निपटाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म होने वाली है। राज्य सरकार ने एक बड़े सुधार की पहल करते हुए सभी विभागों को 'डिजिटल-फर्स्ट' बनाने का आदेश दिया है, ताकि नागरिकों तक सेवाएं तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाना और नौकरशाही की वजह से होने वाली देरी को खत्म करना है।
राज्य के योजना विभाग ने सोमवार को इस संबंध में एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया। 'गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग' (GPR) नामक इस पहल के तहत पांच बड़े सुधार लागू किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं और रोजमर्रा की प्रशासनिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन बनाना है।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
नए नियमों के अनुसार, अब विभागों को पूरी तरह से ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन सिस्टम पर निर्भर रहना होगा। नागरिकों का डेटा सीधे आधार और 'महा-समन्वय' जैसे डेटाबेस से ले लिया जाएगा, जिससे फॉर्म भरने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। साथ ही, जहां भी डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद हैं, वहां फिजिकल दस्तावेज़ जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी। इसके लिए विभाग डिजिलॉकर और एपीआई इंटरऑपरेबिलिटी जैसी तकनीक का इस्तेमाल करेंगे और मुख्य रूप से स्व-घोषणा (Self-Declaration) को मान्यता देंगे।
फैसले होंगे तेज, लालफीताशाही पर लगेगी लगाम
प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए फैसले लेने की प्रक्रिया को अधिकतम तीन स्तरों तक सीमित कर दिया गया है। हर स्तर पर अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट रूप से तय होगी। 'सेवा का अधिकार' (RTS) अधिनियम के तहत तय समय-सीमा में काम पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पूरे बदलाव की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक राज्य-स्तरीय जीपीआर मंजूरी समिति करेगी, जो विभागों के प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी और आसान प्रक्रियाओं को मंजूरी देगी।
इसके अलावा, राज्य की आईटी कंपनी 'महा-आईटी' को जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी पोर्टल में बदलाव का काम प्राथमिकता के आधार पर सौंपा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने "जीरो ब्यूरोक्रेसी" मॉडल के तहत कई प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा तैयार की थी, जिसके तहत हाल ही में राज्य सचिवालय का पुनर्गठन करते हुए विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 कर दी गई थी।
इनपुट: IANS



