शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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एथेनॉल वाला पेट्रोल आपकी जेब पर कैसे डाल रहा है असर? केंद्र सरकार ने बताया पूरा गणित

अगर पेट्रोल में घरेलू एथेनॉल न मिलाया जाता, तो हाल के मध्य-पूर्व संकट के दौरान इसकी कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि एथेनॉल मिश्रण…

एथेनॉल वाला पेट्रोल आपकी जेब पर कैसे डाल रहा है असर? केंद्र सरकार ने बताया पूरा गणित
(फोटो: IANS)

अगर पेट्रोल में घरेलू एथेनॉल न मिलाया जाता, तो हाल के मध्य-पूर्व संकट के दौरान इसकी कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) की वजह से उपभोक्ताओं को प्रति लीटर करीब 30 रुपये की बचत हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जब भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी, तब उपभोक्ताओं ने दिल्ली में 94.77 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया, क्योंकि इस पेट्रोल में 20% हिस्सा देश में बने एथेनॉल का था।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि यह बचत दिखाती है कि एथेनॉल मिश्रण देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने में कितनी अहम भूमिका निभा रहा है। यह कार्यक्रम आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाता है और ईंधन पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था में ही बनाए रखता है।

किस अनाज से बनता है एथेनॉल?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त अनाज का ही इस्तेमाल होता है, जिसकी मंजूरी खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग देता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सभी ज़रूरतें पहले पूरी हों। मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए खरीदा गया अनाज तब तक एथेनॉल के लिए इस्तेमाल नहीं होता, जब तक कि खाद्य सुरक्षा की सभी जरूरतें पूरी न हो जाएं। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से खराब हो चुके अनाज, टूटे हुए चावल और इंसानों के खाने लायक न बचे अनाज का उपयोग किया जाता है।

विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण को लाभ

एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने देश को कई मोर्चों पर फायदा पहुंचाया है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल का आयात कम होने से भारत को 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इसके साथ ही, इस पहल से 950 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम किया गया है।

इस कार्यक्रम से किसानों और डिस्टिलर्स (शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां) को भी सीधा लाभ हुआ है। उन्हें 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे कृषि उत्पादों के लिए एक स्थिर घरेलू बाज़ार तैयार हुआ है। भारत अपनी तेल ज़रूरत का लगभग 88% आयात करता है, ऐसे में एथेनॉल मिश्रण वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव के खिलाफ एक बीमा पॉलिसी की तरह काम करता है।

इनपुट: IANS

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