राजस्थान: ज़िला प्रमुख के पद बढ़े, पर OBC आरक्षण नहीं — हाईकोर्ट ने सरकार से माँगा जवाब
राजस्थान में ज़िला प्रमुखों के कुल पद 33 से बढ़कर 41 हो गए हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों की संख्या अब भी पाँच ही है। इस मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब…
राजस्थान में ज़िला प्रमुखों के कुल पद 33 से बढ़कर 41 हो गए हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों की संख्या अब भी पाँच ही है। इस मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले इस विसंगति पर सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है।
यह मामला राधेराम गोदारा द्वारा दायर एक याचिका के बाद सामने आया, जिसमें ज़िला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी आरक्षण की गणना को चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनूप ढांड की पीठ ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।
कोर्ट का सीधा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब ज़िला प्रमुखों के कुल पदों में वृद्धि हुई है, तो ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को आनुपातिक रूप से क्यों नहीं बढ़ाया गया। अदालत ने कहा कि 2020 में भी 33 में से 5 पद ओबीसी के लिए आरक्षित थे और अब नए ज़िले बनने के बाद 41 पदों में से भी सिर्फ़ 5 ही आरक्षित हैं।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता के वकीलों, अरविंद शर्मा और आनंद शर्मा ने तर्क दिया कि नियमों के अनुसार, कुल पदों की संख्या बढ़ने पर आरक्षण की भी नए सिरे से गणना होनी चाहिए। उन्होंने अपनी गणना के आधार पर बताया कि 41 पदों में से ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर 7 होनी चाहिए, जो कि 2020 में दिए गए 18% आरक्षण के करीब है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह गणना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50% आरक्षण की कुल सीमा के भीतर ही की जाए।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर भी सवाल
याचिका में ओबीसी आयोग की उस रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसे सरकार ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सरकार स्वयं इस रिपोर्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मानती। अदालत ने इन दलीलों पर कोई फ़ैसला नहीं दिया है और सरकार के जवाब का इंतज़ार कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की गई है।
इनपुट: IANS



