तमिलनाडु की 264 ऐतिहासिक इमारतें बनेंगी पर्यटन केंद्र, सरकार ने बनाई संरक्षण और कमाई की योजना
तमिलनाडु सरकार अपनी सैकड़ों ऐतिहासिक इमारतों को एक नई पहचान देने की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का लोक निर्माण विभाग (PWD) इन इमारतों की मरम्मत कर उन्हें…
तमिलनाडु सरकार अपनी सैकड़ों ऐतिहासिक इमारतों को एक नई पहचान देने की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का लोक निर्माण विभाग (PWD) इन इमारतों की मरम्मत कर उन्हें पर्यटन संपत्ति में बदलने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का दोहरा उद्देश्य है – इन ढांचों की अनूठी स्थापत्य विरासत को बचाना और साथ ही उनसे राजस्व उत्पन्न कर उनके दीर्घकालिक रखरखाव को सुनिश्चित करना।
राज्य भर में लोक निर्माण विभाग के नियंत्रण में कुल 264 विरासत इमारतें हैं। ये इमारतें चोल, नायक, मुगल और ब्रिटिश औपनिवेशिक काल समेत कई ऐतिहासिक दौर की गवाह रही हैं। हालांकि, इनमें से कई इमारतें रखरखाव की कमी और संरक्षण पर ध्यान न दिए जाने के कारण खराब हालत में हैं।
विरासत की स्थिति और नई दिशा
एक वरिष्ठ PWD अधिकारी ने बताया कि इन ऐतिहासिक इमारतों का इस्तेमाल करने वाले कई सरकारी विभागों को उनके विरासत महत्व की जानकारी ही नहीं है। समय के साथ हुए संरचनात्मक बदलावों और खराब रखरखाव ने उनके मूल स्थापत्य स्वरूप को नुकसान पहुँचाया है। अभी इन इमारतों का उपयोग स्वास्थ्य, न्यायपालिका, उच्च शिक्षा और राजस्व जैसे सरकारी विभाग कर रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि सिर्फ मरम्मत करके इन्हें वापस सरकारी दफ्तरों को सौंपने से ये फिर से खराब हो सकती हैं। इसलिए, सरकार इन्हें पर्यटन संपत्ति में बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि उनका ऐतिहासिक महत्व भी बना रहे और उनसे कमाई भी हो सके।
पर्यटन से संरक्षण का मॉडल
इस योजना को अमल में लाने के लिए पर्यटन विभाग के साथ बातचीत चल रही है, ताकि ऐसे प्रोजेक्ट्स की पहचान की जा सके जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें। अगर पर्यटन विभाग इन संपत्तियों की जिम्मेदारी नहीं लेता है, तो PWD खुद वहां लाइट-एंड-साउंड शो, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफे और पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएं शुरू करने पर विचार करेगा।
राज्य में सबसे ज्यादा 58 विरासत इमारतें चेन्नई में हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 20, तंजावुर में 17 और कन्याकुमारी, मदुरै व सलेम में 12-12 इमारतें हैं। इस पहल का लक्ष्य विरासत संरक्षण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है, ताकि ये ऐतिहासिक इमारतें आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवंत सार्वजनिक स्थल के रूप में सुरक्षित रहें।
इनपुट: IANS



