शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

भारत की नई सेमीकंडक्टर स्कीम 'सेमिकॉन 2.0' से बदलेगी तस्वीर, अगले 5 साल में 2 लाख नौकरियों की उम्मीद

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'सेमिकॉन 2.0' योजना देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में क्रांति लाने की क्षमता रखती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत का अनुमान है कि यह पहल अगले…

भारत की नई सेमीकंडक्टर स्कीम 'सेमिकॉन 2.0' से बदलेगी तस्वीर, अगले 5 साल में 2 लाख नौकरियों की उम्मीद
(फोटो: IANS)

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'सेमिकॉन 2.0' योजना देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में क्रांति लाने की क्षमता रखती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत का अनुमान है कि यह पहल अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा कर सकती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को सिर्फ मोबाइल और अन्य डिवाइस की असेंबली तक सीमित न रखकर, चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी थी। इसका लक्ष्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण के पूरे इकोसिस्टम को मजबूती देना है। अब तक सरकार ने कुल 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, इनोवेशन पर जोर

एनएलबी सर्विसेज के विश्लेषण के मुताबिक, सेमीकंडक्टर मिशन का यह दूसरा चरण सिर्फ कारखानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा कहीं ज्यादा बड़ा है, जिसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मैन्युफैक्चरिंग जैसे उन्नत क्षेत्र शामिल हैं।

एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलुग ने कहा कि "अब तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मुख्य रूप से असेंबली आधारित उत्पादन पर निर्भर रहा है। हालांकि, सेमिकॉन 2.0 योजना देश को वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का अवसर देगी।" उन्होंने बताया कि इससे बौद्धिक संपदा (IP) का सृजन होगा और भारत को लंबे समय तक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।

बदलेंगे नौकरियों के अवसर

इस बदलाव का असर नौकरियों की प्रकृति पर भी पड़ेगा। सचिन अलुग का अनुमान है कि 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 70 प्रतिशत पदों का स्वरूप बदल जाएगा, जिससे उच्च कौशल वाले इंजीनियरिंग पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। उनके अनुसार, 2030 तक इस क्षेत्र पर केंद्रित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की संख्या में भी 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जो भारत की वैश्विक इंजीनियरिंग और इनोवेशन हब के रूप में पहचान को और पुख्ता करेगा।

इससे पहले इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) भी बता चुका है कि सेमिकॉन 1.0 के तहत 20 अरब डॉलर से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आकर्षित किए जा चुके हैं। अब 'सेमिकॉन 2.0' के तहत सरकार ने इकोसिस्टम के 6 प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया है: चिप डिजाइन, उपकरण और कच्चा माल, फैब्रिकेशन सुविधाएं, टेस्टिंग व पैकेजिंग (ATMP/OSAT) यूनिट्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और प्रतिभा विकास।

इनपुट: IANS

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