भारत का निर्यात जून में 15.5% बढ़ा, लेकिन पेट्रोलियम शिपमेंट में गिरावट से व्यापार घाटा बढ़ा: क्रिसिल रिपोर्ट
भारत के वस्तु निर्यात (merchandise exports) में जून महीने के दौरान पिछले साल की तुलना में 15.5% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह मई के 18% के आँकड़े से थोड़ी धीमी है। समाचार एजेंसी IANS को मिली…
भारत के वस्तु निर्यात (merchandise exports) में जून महीने के दौरान पिछले साल की तुलना में 15.5% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह मई के 18% के आँकड़े से थोड़ी धीमी है। समाचार एजेंसी IANS को मिली क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भारी कमी आने के कारण देश का वस्तु व्यापार घाटा (merchandise trade deficit) बढ़ गया है।
शुक्रवार को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जून में पेट्रोलियम निर्यात घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया, जो मई में 8.4 अरब डॉलर था। इसकी एक बड़ी वजह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आना रही। जून में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 85.4 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि इससे पहले यह 107.1 डॉलर प्रति बैरल था।
कृषि और अन्य क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि निर्यात के मोर्चे पर प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। सालाना आधार पर चावल का निर्यात 16.5%, समुद्री उत्पादों का 14.5% और मांस, डेयरी व पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात 54.6% बढ़ा। वहीं, 'अन्य अनाज' श्रेणी में 244.2% की असाधारण वृद्धि देखी गई।
इसी तरह, रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) का निर्यात भी 34.6% बढ़ा। क्रिसिल ने बताया कि मुख्य निर्यात (core exports) में कुल 15.3% की वृद्धि हुई, जिसने पेट्रोलियम निर्यात में आई गिरावट के असर को कुछ हद तक कम किया। इस बढ़त में मुख्य रूप से ऑर्गेनिक एवं इनऑर्गेनिक केमिकल (19.4%), इलेक्ट्रॉनिक सामान (18.9%) और फार्मास्यूटिकल्स (7.1%) का योगदान रहा। इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि दर थोड़ी घटकर 20.7% पर आ गई, लेकिन इसे अब भी एक मजबूत स्तर माना जा रहा है।
आयात बढ़ने और भविष्य के अनुमान
एक तरफ जहाँ निर्यात की गति थोड़ी धीमी हुई, वहीं दूसरी ओर वस्तु आयात (merchandise imports) 31% बढ़कर 70.8 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसका मुख्य कारण तेल और सोने की अधिक खरीद के साथ-साथ मुख्य आयात (core imports) में तेज बढ़ोतरी रहा।
रिपोर्ट में कच्चे तेल और अन्य जिंसों की ऊँची कीमतों को चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit - CAD) पर दबाव का मुख्य कारण बताया गया है। रेटिंग एजेंसी ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2027 में CAD बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.5% हो सकता है, जो वित्त वर्ष 2026 में 0.6% था। क्रिसिल का मानना है कि अगले एक साल में कच्चे तेल की औसत कीमत 82-87 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है, लेकिन पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव इस अनुमान के लिए एक बड़ा जोखिम बने हुए हैं।
इनपुट: IANS



