सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के लिए 15 नए जजों के नामों की सिफारिश की
देश के चार उच्च न्यायालयों को जल्द ही 15 नए न्यायाधीश मिल सकते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और जम्मू-कश्मीर एवं…
देश के चार उच्च न्यायालयों को जल्द ही 15 नए न्यायाधीश मिल सकते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्णय गुरुवार को हुई कॉलेजियम की बैठक में लिया गया।
कॉलेजियम द्वारा मंजूर किए गए नामों में सबसे अधिक आठ न्यायिक अधिकारी दिल्ली हाईकोर्ट के लिए हैं। इसके अलावा कर्नाटक और झारखंड के लिए तीन-तीन और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के लिए एक नाम की सिफारिश की गई है।
विभिन्न हाईकोर्ट के लिए अनुशंसित नाम
दिल्ली हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में इन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को दिल्ली हाई कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।" जिन आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की गई है, वे हैं- गुरविंदर पाल सिंह, निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा-I, भरत पाराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज।
कर्नाटक हाईकोर्ट: कॉलेजियम ने कर्नाटक के लिए न्यायिक अधिकारी उषा रानी, के.एस. भरत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी है।
झारखंड हाईकोर्ट: झारखंड के लिए न्यायिक अधिकारी मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नामों की सिफारिश की गई है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट: इस संयुक्त हाईकोर्ट के लिए न्यायिक अधिकारी यश पॉल बॉर्नी को न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।
नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर' के अनुसार होती है। इसकी शुरुआत संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श के बाद की जाती है। यह सिफारिश मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल तक पहुँचती है, जो इसे केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री को भेजते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार प्रस्ताव को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास भेजती है, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों से सलाह-मशविरा कर कॉलेजियम की सिफारिश को अंतिम रूप देते हैं। कॉलेजियम की मंजूरी के बाद, सिफारिश वापस केंद्र सरकार को भेजी जाती है। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करने और न्याय विभाग द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद नियुक्तियां प्रभावी होती हैं।
इनपुट: IANS



