नारायण साईं को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा पर रोक लगाने से किया इनकार
स्वयंभू संत आसाराम के बेटे नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे साईं की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सज़ा पर रोक लगाने से…
स्वयंभू संत आसाराम के बेटे नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे साईं की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सज़ा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें साईं की ज़मानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।
हालांकि, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने साईं की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए गुजरात हाईकोर्ट से एक अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट साईं की सज़ा के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर जल्द से जल्द, और संभव हो तो तीन महीने के भीतर सुनवाई करके फैसला करने का प्रयास करे।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?
नारायण साईं ने अपनी सज़ा पर रोक और ज़मानत की मांग करते हुए गुजरात हाईकोर्ट में लगातार पांचवीं बार अर्जी दी थी। इस साल 4 मई को हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “हमारे लिए यह मानना मुश्किल है कि दोषी के बरी होने की अच्छी संभावना है।” अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जब किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध का दोषी ठहराया जाता है, तो “उसके निर्दोष होने की धारणा खत्म हो जाती है”।
साईं के वकील ने लंबे समय से जेल में बंद होने की दलील दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आरटी वछानी की बेंच ने कहा था कि अपील के निपटारे में हो रही देरी के लिए साईं खुद जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने अंतिम सुनवाई पर ज़ोर देने की बजाय बार-बार ज़मानत अर्जियां लगाईं। हाईकोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड में है कि आरोपी अपील की सुनवाई के लिए कभी तैयार नहीं होता। दोषी ने खुद ही अपनी लंबी जेल की स्थिति पैदा की है।”
क्या था पूरा मामला?
नारायण साईं को सूरत की एक ट्रायल कोर्ट ने 30 अप्रैल, 2019 को अपनी एक महिला अनुयायी से बार-बार बलात्कार करने का दोषी पाया था। उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(सी) (बलात्कार) और 377 (अप्राकृतिक अपराध) समेत विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता 2001 में साईं के संपर्क में आई थी। उसने आरोप लगाया कि 2001 से 2004 के बीच बिहार, सूरत और गंभोई के आश्रमों में साईं ने उसका कई बार यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने अक्टूबर 2013 में तब FIR दर्ज कराई थी, जब साईं के पिता आसाराम को भी ऐसे ही एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 2013 में फरार चल रहे नारायण साईं को दिल्ली पुलिस ने पंजाब-हरियाणा सीमा से गिरफ्तार किया था।
इनपुट: IANS



