आंध्र प्रदेश: 'दिशा' विधेयक वापस लेने पर पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी ने सरकार को घेरा, बताया 'काला दिन'
आंध्र प्रदेश की नई चंद्रबाबू नायडू सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े 'दिशा विधेयक' को वापस लेने का फैसला किया है, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) प्रमुख…
आंध्र प्रदेश की नई चंद्रबाबू नायडू सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े 'दिशा विधेयक' को वापस लेने का फैसला किया है, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कदम को राज्य की महिलाओं और बच्चों के लिए एक "काला दिन" बताते हुए कहा कि राजनीतिक द्वेष के चलते एक व्यापक सुरक्षा तंत्र को खत्म किया जा रहा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में आंध्र प्रदेश दिशा बिल (क्रिमिनल लॉ एपी संशोधन विधेयक, 2019) को रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार का तर्क है कि विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ प्रावधानों पर स्पष्टीकरण मांगते हुए इसे संशोधित कर दोबारा पेश करने का सुझाव दिया था।
क्या था दिशा सुरक्षा तंत्र?
जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि दिशा सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक समग्र व्यवस्था थी। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, जांच में देरी और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए इसे लागू किया था। इस तंत्र के तहत कोई भी महिला संकट के समय अपने मोबाइल पर SOS बटन दबाकर या फोन को पांच बार हिलाकर तत्काल पुलिस सहायता पा सकती थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 1.51 करोड़ से ज्यादा लोगों ने दिशा ऐप डाउनलोड किया था और उनकी सरकार के कार्यकाल में ऐप से मिली 31,607 आपातकालीन कॉल्स पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
बुनियादी ढांचे और आंकड़ों पर जोर
जगन ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए बताया कि दिशा व्यवस्था के तहत 18 विशेष महिला पुलिस थाने, 13 विशेष पॉक्सो अदालतें और 12 विशेष महिला अदालतें स्थापित की गई थीं। इसके अलावा, गांव और वार्ड स्तर तक महिला पुलिस की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 13,500 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच का औसत समय 2017 के 156 दिनों से घटकर 2022 में मात्र 28 दिन रह गया था। वाईएसआरसीपी प्रमुख के मुताबिक, मई 2024 तक महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 27% की कमी आई थी।
सरकार के फैसले पर सवाल
जगन मोहन रेड्डी ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि दिशा विधेयक वापस लेने से अपराधियों में कानून का डर कम होगा और महिलाओं का सरकार पर से भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारतीय न्याय संहिता (BNS) पर्याप्त है, तो यह दिशा जैसी विशेष व्यवस्था का विकल्प कैसे हो सकती है, जिसमें SOS प्रणाली से लेकर विशेष अदालतों और यौन अपराधियों के डेटाबेस तक की सुविधाएं शामिल थीं। उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से अपना फैसला वापस लेने और दिशा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है।
इनपुट: IANS



