बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान: SC-ST अत्याचार के मामलों में 28% की कमी, सरकार ने कहा - सख्त निगरानी का असर

राजस्थान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच ऐसे अपराधों…

राजस्थान: SC-ST अत्याचार के मामलों में 28% की कमी, सरकार ने कहा - सख्त निगरानी का असर
(फोटो: IANS)

राजस्थान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच ऐसे अपराधों में 28 प्रतिशत की कमी आई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस कमी का श्रेय SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कड़ाई से पालन और मामलों की जांच की मजबूत निगरानी को दिया है।

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मंगलवार को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में यह जानकारी सामने आई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एससी और एसटी समुदायों की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर देने का निर्देश दिया।

जांच और न्याय में तेजी

बैठक में पेश आंकड़ों से पता चलता है कि मामलों के निपटारे में भी काफी तेजी आई है। अब लगभग 68 प्रतिशत मामलों का निपटारा कानून के तहत निर्धारित 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण सुधार है, क्योंकि 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ 35.16 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर करीब 47 प्रतिशत और जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गया। इसी तरह, मामलों की जांच में लगने वाला औसत समय भी 128 दिनों से घटकर अब मात्र 53 दिन रह गया है।

प्रशासनिक सुधार और निर्देश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव लगातार निगरानी, बेहतर पुलिसिंग और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए:

  • समन्वय: दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग मिलकर काम करें।
  • SC-ST प्रकोष्ठ: राज्य के बाकी बचे 6 पुलिस जिलों में भी जल्द एससी-एसटी प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएं। अभी 45 जिलों में ये प्रकोष्ठ काम कर रहे हैं।
  • नियमित बैठकें: जिला और उपमंडल स्तर पर सतर्कता समितियों की नियमित बैठकें हों और पंचायत स्तर पर साल में दो बार निगरानी बैठकें आयोजित की जाएं।
  • वित्तीय सहायता: FIR दर्ज होने से लेकर अदालती फैसले तक, हर चरण में पात्र पीड़ितों को समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए।
  • लंबित मामले: एक साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि बंद किए गए मामलों (Final Report) के रैंडम सत्यापन की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे निगरानी और जवाबदेही बढ़ी है। बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इनपुट: IANS

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News4Social राजस्थान डेस्क

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