टैक्स विवाद घटाने में सरकार को बड़ी कामयाबी, अपील की सीमा बढ़ाने से ₹16,690 करोड़ के मामले सुलझे
केंद्र सरकार की एक अहम नीतिगत पहल से टैक्स विवादों के बोझ में भारी कमी आई है। विभागीय कर अपील दायर करने के लिए न्यूनतम मौद्रिक सीमा बढ़ाने के फैसले के बाद लगभग 16,690 करोड़ रुपए की विवादित कर मांग घट…
केंद्र सरकार की एक अहम नीतिगत पहल से टैक्स विवादों के बोझ में भारी कमी आई है। विभागीय कर अपील दायर करने के लिए न्यूनतम मौद्रिक सीमा बढ़ाने के फैसले के बाद लगभग 16,690 करोड़ रुपए की विवादित कर मांग घट गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम से विभिन्न न्यायिक मंचों पर मुकदमों का अंबार कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित नई सीमाओं के लागू होने के बाद आयकर विभाग ने बड़ी संख्या में अपनी अपीलें या तो वापस ले ली हैं या फिर उन्हें दायर ही नहीं किया है।
न्यायिक मंचों पर घटा मुकदमों का बोझ
इस फैसले का सबसे बड़ा असर आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT), उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों पर पड़ा है। वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:
- आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT): यहां 11,390 अपीलें दायर नहीं की गईं और 443 मामले वापस ले लिए गए। इससे 3,662.82 करोड़ रुपए की विवादित राशि के मामले खत्म हुए।
- उच्च न्यायालय: इनमें 5,565 नई अपीलें नहीं हुईं और 4,791 पुराने मामले वापस लिए गए, जिससे 9,218.71 करोड़ रुपए के विवादों का समाधान हुआ।
- सर्वोच्च न्यायालय: शीर्ष अदालत में भी विभाग ने 534 अपीलें दायर नहीं कीं और 744 मामले वापस ले लिए, जिससे 3,807.15 करोड़ रुपए की कर मांग से जुड़े विवाद समाप्त हो गए।
इन तीनों स्तरों पर मिलाकर विवादित कर मांग में कुल 16,690 करोड़ रुपए की कमी आई है, जिससे न्यायपालिका और करदाताओं, दोनों को राहत मिली है।
क्या हैं अपील की नई सीमाएं?
वित्त मंत्री ने बताया कि बजट 2024-25 के तहत 17 सितंबर, 2024 से प्रत्यक्ष कर मामलों में विभागीय अपील दायर करने के लिए नई मौद्रिक सीमाएं लागू की गई हैं। अब आयकर विभाग ITAT में 60 लाख रुपए, उच्च न्यायालय में 2 करोड़ रुपए और सर्वोच्च न्यायालय में 5 करोड़ रुपए से कम के मामलों में अपील नहीं कर सकेगा।
श्रीमती सीतारमण ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने पिछले 12 वर्षों में करदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए कई सुधार किए हैं। इनमें पहले से भरे हुए रिटर्न फॉर्म, फेसलेस असेसमेंट और अपील प्रणाली, और अनुमानित कराधान योजना के विस्तार जैसे कदम शामिल हैं।
इनपुट: IANS



